बड़वानी में किसान पशुओं को खिला रहे टमाटर:कहा- 2 से 3 रुपए किलो बिक रहा, इससे मजदूरी भी नहीं निकल रही

बड़वानी में टमाटर 70 से 100 रुपए की कैरेट बिक रहा है। इससे किसानों की मजदूरी भी नहीं निकल पा रही है। मजबूरी में किसान टमाटर पशुओं को खिला रहे हैं। टमाटर की आई बम्पर पैदावार के चलते टमाटर के भाव जमीन पर आ गए हैं। इससे किसानों को लागत और मेहनत के दाम भी नहीं मिल रहे हैं। मजबूरी में किसान अपने खेत खाली करने को रोज भाव मिलने की उम्मीद लेकर मंडी आ रहे हैं। लेकिन उनका भाड़ा निकलना भी मुश्किल हो रहा है। कुछ किसान अपने जानवरों को टमाटर खिला रहे हैं। ताकि खेत खाली हो और नई फसल लगा सकें। किसान बोले- बेचने में माल से ज्यादा भाड़ा लग रहा सेगांव के किसान राधेश्याम गेहलोद का कहना है कि काफी लागत लगाकर टमाटर की खेती की है। 8 एकड़ में लगाए थे। भाव नहीं होने के कारण अब पशुओं को खिलाना पड़ रहा है। थोक में 70 से 100 रुपए का एक कैरेट टमाटर बिक रहा है। इससे तो लागत दूर मजदूरी भी निकाल पाना मुश्किल है। बेचने में माल से ज्यादा भाड़ा लग रहा है। थोक विक्रेताओं का कहना हैं कि एक कैरेट हम किसानों से 70 से 80 रुपए में खरीद रहे हैं। जबकि वह 40 रुपए भाड़ा लगाकर उसे मंडी तक ला रहे हैं। वहीं हाल फुटकर टमाटर विक्रेता भी दिनभर पसीना बहाकर कड़ी धूप में 15 रुपए किलो बेचने को मजबूर हैं। खरीददार नहीं मिल रहे मंशाराम पंचोले ने बताया कि दर्जनों गांवों में टमाटर की खेती बड़े पैमाने पर होती है। इस बार उपज भी अच्छी है। लेकिन, खरीदार नहीं मिल रहे हैं। बाजार में काफी कम कीमत मिल रही है। उन्होंने ने बताया कि हर साल टमाटर की खेती करते हैं। पहले दाम भी ठीकठाक मिल जाता था। इस बार दो से तीन रुपए किलो तक के ही खरीदार मिल रहे हैं। 2 से 3 रुपए किलो बिक रहा टमाटर वह भी काफी खुशामद करने के बाद। किसान ने कहा कि जिले में कोल्ट स्टोरेज की व्यवस्था नहीं रहने के कारण खेत में ही टमाटर सड़ रहे हैं। किसानों ने कहा कि एक किलो टमाटर उपजाने में कम से कम 8 से 10 रुपए का खर्च आता है। जबकि, वर्तमान में कीमत महज दो से तीन रुपए किलो है। लाचारी में तैयार टमाटरों को जानवरों को खिला रहे हैं। बाजार में 15 से 20 रुपए किलो दाम बाजार में टमाटर 15 से 20 रुपए किलो बिक रहा है। बड़वानी शहर के पाला बाजार पर सब्जी की दुकान चलाने वाले मधु भाई ने कहा कि बड़े व्यापारियों से आठ से नौ रुपए की दर से खरीदकर लाते हैं। दुकान तक लाने में एक रुपया किलो भाड़ा खर्च हो जाता है। इसके बाद टमाटर की छंटाई करते हैं। अच्छा टमाटर 20 रुपए किलो तक बिक जाता है। क्वालिटी में जो थोड़ा खराब रहता है वह 15 रुपए किलो बिकता है। दुकानदार ने कहा कि मांग कम रहने के कारण अभी और टमाटर का दाम गिरेगा। सब्जियों का भी हो समर्थन मूल्य किसानों ने कहा कि अनाज की तरह सब्जियों का भी समर्थन मूल्य घोषित किया जाना चाहिए। ताकि ऐसी स्थिति में नुकसान ना हो। उन्होंने बताया कि दरअसल, किसान को जिस फसल में ज्यादा लाभ दिखाई देता है, वह उसे बहुतायत में लगा लेते हैं। इसकी पैदावार ज्यादा हो जाने के चलते यह स्थिति बनती है। अनुदान देने का नहीं है प्रवाधान टमाटर की मार से बेहाल किसानों को सरकार की ओर से किसी तरह का अनुदान नहीं मिल पाएगा। कृषि विभाग के अधिकारियों ने कहा कि बाजार की जो व्यवस्था है, उसमें कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता। फसल क्षति होने पर ही सरकारी मदद का प्रवाधान है। लेकिन, यहां स्थिति दूसरी है। उन्होंने कहा कि टमाटर उत्पादक किसानों के लिए सरकार कैच उद्योग लगाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। कैचअप उद्योग के लिए 50 फीसदी अनुदान मिलता है। टमाटर उत्पादकों को इसका लाभ लेना चाहिए।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *