बड़वानी में नर्मदा बचाओ आंदोलन के बैनर तले मंगलवार शाम करीब 5.30 बजे बड़ी संख्या में डूब प्रभावितों और किसानों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर सरकार की किसान विरोधी नीति का विरोध किया। इस दौरान किसान विरोधी नीति के कागज जलाकर एनबीए ने अपनी नाराजगी व्यक्त की। प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री और मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार जगदीश वर्मा को ज्ञापन भी सौंपा गया। नर्मदा बचाओ आंदोलन की प्रमुख मेधा पाटकर ने बताया कि सभी फसलों का उचित दाम किसानों को मिले। ज्ञापन में बताया गया कि 13 महीनों तक चले किसानों के राष्ट्रीय जन आंदोलन के बाद 750 शहीद होने बाद 9 दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री की ओर से लिखित आश्वासन के साथ तीन किसान विरोधी साबित हुए कानूनों की वापसी हुई थी। हमें इस पर खेद और गंभीर आपत्ति है कि नई राष्ट्रीय कृषि व्यापार संबंधित नीति फिर से उन्हीं तीन कानूनों की ओर कृषि क्षेत्र और कृषकों को धकेलने वाली है। यह भी विशेष है कि आज भी हर कृषि और प्राकृतिक उपज को सही, न्यायपूर्ण दाम की मांग को लेकर जब किसानी से जुड़े सभी समुदाय, जिनमें कृषि, मजदूर, पशुपालक, मछुआरे, वन निर्भर आदिवासी भी शामिल है, आंदोलित है। तब भी इस नीति के नए मसौदे में एमएसपी स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों पर आधारित न्यूनतम समर्थन मूल्य के बारे में कोई आश्वासन या जिक्र भी नहीं है। यह बहुत ही गंभीर कृषक विरोधी कृषि व्यापार बढ़ाने की बात है, जो हमें नामंजूर है। ज्ञापन के समय नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर, भगवान सेप्टा, कमला यादव, धनराज अवस्या, कोरजी यादव, राहुल यादव, देवीसिंह तोमर, गौरीशंकर कुमावत, कैलाश यादव आदि मौजूद थे।


