स्वामी विवेकानंद की जयंती और राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर रविवार को बड़वाह में सामूहिक सूर्य नमस्कार के भव्य आयोजन हुए। नगर के सांदीपनी स्कूल और शासकीय महाविद्यालय में विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ योगाभ्यास किया। विकासखंड स्तरीय मुख्य कार्यक्रम सांदीपनी विद्यालय में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती और स्वामी विवेकानंद के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई। मुख्य अतिथि एसडीएम सत्यनारायण दर्रो, तहसीलदार शिवराम कनासे,दीपक ठाकुर,बीईओ रेवाराम वर्मा और बीआरसी मेवाराम बर्मन ने दीप प्रज्वलन किया। इस दौरान स्कूल की प्राचार्य हंसा कानूड़े और उपप्राचार्य निर्मल चौधरी भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में सूर्य नमस्कार के मुख्य प्रशिक्षक डीएस चौहान,नीति देशवाली और गौरीशंकर शर्मा ने मंच से क्रमानुसार योग की मुद्राएं करवाईं,जिसका अनुसरण अतिथियों और बच्चों ने किया।अतिथियों ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि सूर्य नमस्कार को केवल एक दिन का आयोजन न मानकर इसे प्रतिदिन करें और अपने परिवार के सदस्यों को भी करवाएं, ताकि सभी स्वस्थ रहें।कार्यक्रम में शिक्षक विशालसिंह चौहान,अनुप अत्रे,सतविंदर सिंह भाटिया,अंकित बर्वे आदि उपस्थित थे।कार्यक्रम का संचालन खेल शिक्षक डीएस चौहान ने किया। शासकीय महाविद्यालय बड़वाह में योग दिवस गरिमामय तरीके से मनाया गया। मुख्य अतिथि जनभागीदारी समिति अध्यक्ष जितेंद्र सुराणा,भाजपा किसान मोर्चा ग्रामीण मंडल अध्यक्ष महीपाल सिंह मेवाड़े और विशेष अतिथि रवि एरन थे। कार्यक्रम में एनसीसी कैडेट्स के साथ ‘ज्योतिर्मय मूक बधिर सेवा संस्था’ के दिव्यांग विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक योगाभ्यास किया। योग शिक्षक डीके कैथवास ने सभी को योगासन करवाए। मुख्य अतिथि जितेंद्र सुराणा ने युवाओं से विवेकानंद के आदर्शों को आत्मसात करने की अपील की। वहीं, महीपाल सिंह मेवाड़े ने प्रतिदिन सूर्य नमस्कार के साथ स्वदेशी वस्तुओं और भोजन को अपनाने पर जोर दिया। रवि एरन ने योग से आने वाले सकारात्मक बदलावों के बारे में बताया। कार्यक्रम के अंत में जन अभियान परिषद द्वारा मूक-बधिर बच्चों के लिए ‘स्वदेशी दौड़’ का आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों ने दौड़ लगाकर स्वदेशी को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का संदेश दिया। इस अवसर पर मूक बधिर स्कूल संचालिका प्रेमलता तिवारी, नगर प्रस्फुटन समिति के रितेश दुबे, देशा मेराना एवं समस्त स्टाफ उपस्थित रहा। आभार प्रो. गगनदीप कौर ने व्यक्त किया।


