मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी सेवा व्यवस्था में बड़ा और दूरगामी बदलाव करते हुए कार्यभारित (वर्कचार्ज), आकस्मिक स्थापना (कंटिनजेंसी), स्थायी कर्मी (दैनिक वेतन भोगी) और स्थायी वर्गीकृत (240 दिवसीय सेवा) इन चार कैडर के सभी पदों को सांख्येतर (डाइंग) घोषित कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया। इस निर्णय का अर्थ है कि इन पदों पर अब कोई नई भर्ती नहीं होगी। जैसे-जैसे मौजूदा कर्मचारी सेवानिवृत्त होंगे या पद रिक्त होंगे, ये पद अपने आप समाप्त होते जाएंगे। प्रदेश में इन चार कैडर में कार्यरत कर्मचारियों की संख्या लगभग 1.25 लाख से 1.50 लाख के बीच बताई जा रही है। इस फैसले के बाद राज्य शासन में अब केवल तीन तरह की सेवाएं रहेंगी। नियमित (रेगुलर), संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) और आउटसोर्स। वो सबकुछ जो आपको जानना जरूरी है मौजूदा कर्मचारियों पर असर नहीं, दावा- अवकाश, ग्रेच्युटी व अनुकंपा नियुक्ति में भेदभाव खत्म होगा मौजूदा कर्मचारियों पर क्या असर?
– सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले से वर्तमान कर्मचारियों की नौकरी या सेवा लाभों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यदि किसी कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु होती है, तो उनके परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति स्थायी पद पर मिलेगी।
– दावा है कि दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को पहले ही नियमित कर उन्हें औद्योगिक श्रमिक का दर्जा दिया जा चुका है, इसलिए कैडर खत्म होने से उनके हक प्रभावित नहीं होंगे। सरकार ने फैसला क्यों लिया?
– राज्य सरकार का तर्क है कि इससे स्थायी और अस्थायी पदों का फर्क खत्म होगा। कर्मचारियों के अधिकारों में समानता आएगी। अर्जित अवकाश, ग्रेच्युटी और अनुकंपा नियुक्ति में भेदभाव खत्म होगा। कोर्ट-कचहरी में पुराने विवाद समाप्त होंगे। सर्वाधिक असर किस विभाग पर?
– सबसे ज्यादा असर लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग पर पड़ेगा। इन दोनों विभागों में इन 4 कैडर के करीब 70% कर्मचारी कार्यरत हैं।
– सरकार का कहना है कि अब इन विभागों में बड़े प्रोजेक्ट ठेका (टेंडर) प्रक्रिया से निजी एजेंसियों के जरिए कराए जाते हैं, इसलिए वर्कचार्ज और कंटिनजेंसी पदों की जरूरत नहीं रही। क्या आर्थिक बोझ बढ़ेगा?
– सरकार ने साफ किया है कि फैसले से अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा, क्योंकि नई भर्तियां नहीं होंगी। मौजूदा कर्मचारियों को पहले से मिल रहे लाभ जारी रहेंगे। पहले कहां होता था भेदभाव?
इन कैडर के कर्मचारियों को नियमित पदों की तुलना में अर्जित अवकाश के भुगतान, ग्रेच्युटी की गणना, 2018 से पहले अनुकंपा नियुक्ति जैसे मामलों में भेदभाव झेलना पड़ता था। दावा है कि अब यह असमानता पूरी तरह खत्म होगी।


