बदलता ट्रेंड…:घरों से बैंक्वेट हॉल तक पहुंचा पर्व, लोग थीम बेस्ड सजावट करा रहे

भास्कर न्यूज | जालंधर बदलते वक्त के साथ लोहड़ी के पर्व को मनाने के तरीको‌ं म‌ें कई बदलाव आए हैं। लोहड़ी अब घरों से निकलकर बैंक्वेट हॉल तक पहुंच चुकी है। लोग परंपरागत थीम बेस्ड सजावट करवा रहे हैं। लोग इसे अब बड़े स्तर पर सेलिब्रेट करने लगे हैं। त्योहार के आयोजन में भी बदलाव नजर आ रहा है। परंपरागत सजावट के साथ अब मॉडर्न फ्यूजन थीम का चलन तेजी से बढ़ा है। ढोल, पतंगें और तांबे के बर्तनों के साथ खास तरह की सजावट करवाई जा रही है, जिससे पंजाबी संस्कृति और आधुनिक अंदाज का मेल दिख सके। इस साल लोहड़ी को लेकर शहर के ज्यादातर होटल और बैंक्वेट हॉल पहले से ही बुक हो चुके हैं। इवेंट मैनेजर मयंक कहते हैं कि शहर में होटलों और बैंक्वेट हॉल में लोहड़ी मनाने का ट्रेंड लगातार बढ़ रहा है। लोहड़ी की सजावट के लिए बुकिंग तीन से चार महीने पहले ही शुरू हो गई थी, जबकि होटलों की बुकिंग छह महीने पहले से हो चुकी थी। वर्तमान में शहर के अधिकतर बड़े होटल लोहड़ी के आयोजनों के लिए पूरी तरह बुक हैं। मयंक के अनुसार, लॉकडाउन के बाद से होटलों में लोहड़ी मनाने का चलन तेजी से बढ़ा। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के चलते लोग अब थीम बेस्ड पार्टियों और खास सजावट पर ज्यादा ध्यान देने लगे हैं। लोग अपने लोहड़ी फंक्शन की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर कर एक-दूसरे को दिखाना चाहते हैं, जिसके चलते आयोजनों को और भव्य बनाया जा रहा है। पहले जहां घरों में ढोल की थाप पर भांगड़ा, अलाव और पारंपरिक तरीके से लोहड़ी मनाई जाती थी, वहीं अब बोनफायर के साथ लाइव बैंड, म्यूजिक और बच्चों के लिए फन गेम्स भी आयोजनों का हिस्सा बन चुके हैं। इसके साथ मंझियां और मुहड़े लगाकर गांव जैसा माहौल तैयार किया जाता है। लोगों के बीच थीम बेस्ड सेल्फी कॉर्नर भी खासा आकर्षण बने हुए हैं, जहां मेहमान फोटो खिंचवाते नजर आते हैं। इस बार शहर में लोहड़ी के फंक्शन तीन जनवरी से ही शुरू हो चुके हैं। इवेंट मैनेजरों के अनुसार रोजाना 5 से 10 सजावट के ऑर्डर आ रहे हैं। त्योहारों को मनाने का तरीका बदलने लगा है। लोहड़ी पर गार्डेन में की गई सजावट। शहर में लोहड़ी की धूम . समाजसेवी संस्थाओं और सोसायटियों ने वंचितों के बीच जाकर बांटी खुशियां, लोहड़ी पूजन में की सभी की सुख-समृद्धि और भले की कामना जालंधर| शहर में सोमवार को लोहड़ी का पर्व बड़े ही उत्साह और पारंपरिक ढंग से मनाया गया। विभिन्न सामाजिक संस्थाओं, आवासीय सोसायटियों और क्लबों में कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां लोगों ने मिलकर आग जलाई, मूंगफली-रेवड़ी का आनंद लिया और ढोल की थाप पर जमकर भंगड़ा किया। शहर की प्रमुख संस्थाओं ने लोहड़ी के अवसर पर विशेष समारोह आयोजित किए। कार्यक्रम की शुरुआत लोहड़ी पूजन के साथ हुई, जिसमें अग्नि देव को रेवड़ी, मूंगफली, पॉपकॉर्न और तिल अर्पित किए गए। संस्था के पदाधिकारियों ने समाज की सुख-समृद्धि की कामना की। कई जगहों पर गरीब बच्चों को मिठाई और गर्म कपड़े बांटकर सामाजिक सद्भाव का संदेश भी दिया गया। शहर की आवासीय सोसायटियों में भी खूब रौनक देखने को मिली। सोसाइटी के कॉमन पार्क में बड़ा अलाव (लोहड़ी) जलाई गई। इंसान की दौड़-भाग भरी जिंदगी में ठहराव लाने का काम त्योहार करते हैं। वैसे हर त्योहार मुख्य तौर पर अपने संस्थापक समाज की तर्जमानी करता है, त्योहार में उसका नंबर पहले, फिर बाकियों की बारी। लेकिन साल के पहले ही महीने में लोहड़ी ऐसा त्योहार है जो बंधनमुक्त है। यह सबका है। इसके आगे कोई न तगड़ा है न कमजोर। इसकी तो फिलॉस्फी ही दूसरों की मदद करना है। ये ढंग सरल है। सर्द शाम में बस दोस्तों के लिए समय निकालिए और अलाव के साथ इकट्ठे बैठ एक-दूसरे के साथ अपना मन खोलिए। लोहड़ी इकलौता त्योहार है, जो दुनिया के जिस हिस्से में पंजाबी गए, वहां पहुंचा। लैहंदे-चढ़दे पंजाब से लेकर अफगानिस्तान और हिमालय तक। अब कनाडा, अमेरिका और इंग्लैंड में भी यह मनाया जाने लगा है। डाकू दुल्ला भट्टी संपन्नों को लूटता था लेकिन गरीबों की बेटियों की शादी करता था। अब तो बेटी के जन्म पर भी लोहड़ी डाली जाती है। आज भी परिजन लोहड़ी पर अपनी बेटियों के घर कुछ तोहफे और उनकी जिंदगी को सरल करने का सामान लेकर जाते हैं। इस त्योहार में यह मूल विचार है कि जितना बल पड़े, दूसरों की मदद कीजिए। दशकों पहले इंसानी जीवन में तकनीक का दखल कम था। किसान और जुड़े कामगार मेलों-त्योहारों पर एकत्रित होते थे। जब तकनीक आई तो इंसान के कामकाज के घंटे भी बढ़े। परिवार अंतरमुखी हो गए। यही वजह है कि निजी मन का तनाव शीर्ष पर है। अपने घर के अंदर ही सैलफोन में हर शख्स अंतरमुखी है। लेकिन जब जिंदगी की चुनौती में भावनाओं का स्तर ऊफान पर होता है तो इंसान अपनी उलझनों के आगे हार जाता है। ऐसे में हमें हमारे त्योहार जीवन में ठहराव लाने का मौका देते हैं। लोहड़ी तो और भी खास है। आज उन दोस्त के पास चले जाएं जहां महीनों-सालों से नहीं गए। उन जगहों पर मदद देने जाएं, जहां आपका इंतजार है। यही लोहड़ी है… सबकी लोहड़ी। बराबरी की लोहड़ी और तनाव दूर करने वाले दोस्तों-रिश्तेदारों के एहसास ही लोहड़ी है। पुराने वक्त में जिंदगी की थकान त्योहार मिटाते थे, अब तनाव में घिरे दिमाग को ताकत देने का ढंग त्योहार मनाना है। पंजाबी विभाग, डीएवी कॉलेज बाय इंविटेशन

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