बदली तकदीर:भट्ठों की मजदूरी छोड़ बनीं मालिक अब ईंटें बनाकर कमा रहीं मुनाफा

जिले के राज नगर ग्राम पंचायत की महिलाएं अब सिर्फ घरेलू कामों तक सीमित नहीं रहीं। जिन कामों को कभी पुरुषों का क्षेत्र माना जाता था, आज उन्हीं कामों पर ग्रामीण महिलाओं ने अपना कब्जा जमा लिया है। पहले ईंट भट्टों पर मजदूरी करने वाली महिलाएं अब भट्टे की आग से बाहर निकलकर सीमेंट से बनी मजबूत ईंटें तैयार कर रही हैं और इससे अच्छी खासी कमाई भी कर रही हैं। ग्राम पंचायत राज नगर में मां दंतेश्वरी कावेरी महिला स्व-सहायता समूह इस बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल बनकर उभरा है। समूह में करीब 10 महिलाएं शामिल हैं। ये महिलाएं पहले मिट्टी की पारंपरिक ईंटें बनाती थीं और दूसरे लोगों के ईंट भट्टों पर मजदूरी करती थीं। वहीं काम करते हुए महिलाओं के मन में खुद का बिजनेस शुरू करने का विचार आया। लगातार मेहनत के बावजूद सीमित मजदूरी मिलने से परेशान महिलाओं ने तय किया कि अब दूसरों के लिए नहीं, बल्कि खुद के लिए काम करेंगी। महिलाओं ने भट्टे में जलने वाली मिट्टी की ईंटों को छोड़कर अब सीमेंट ईंट निर्माण की शुरुआत की है। इस तकनीक में ईंटों को भट्टे में पकाने की जरूरत नहीं होती, जिससे समय, खर्च और जोखिम तीनों कम हो जाते हैं। साथ ही पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचता। ईंट निर्माण के लिए जरूरी मटेरियल महिलाएं स्थानीय स्तर पर ही खरीद रही हैं। समिति की कोषाध्यक्ष चंपा भारती ने बताया कि ईंट और पेवर ब्लॉक का व्यवसाय शुरू करने के लिए पूंजी की जरूरत थी। शुरुआत में समूह ने मध्यान्ह भोजन (मिड-डे मील) का काम लिया, जिससे कुछ पैसे जमा हुए। इसके बाद एनआरएलएम के सहायक प्रबंधक राजकुमार देवांगन की मदद से बैंक से दो लाख रुपये का लोन लिया गया। इसी पूंजी के सहारे महिलाओं ने सीमेंट ईंट और पेवर ब्लॉक निर्माण का काम शुरू कर दिया। वर्तमान में समूह करीब 24 हजार सीमेंट ईंटें तैयार कर चुका है। इनमें से 12 हजार ईंटें 2 लाख 40 हजार रुपये में बिक चुकी हैं। इस सौदे से महिलाओं को हजारों रुपए का शुद्ध मुनाफा हुआ है। महिलाओं का कहना है कि यह काम लगातार जारी है और आने वाले समय में उत्पादन बढ़ाने की तैयारी है। पीएम आवास में हो रही इन ईंटों की खपत
महिलाओं द्वारा बनाई जा रही सीमेंट ईंटों की मांग तेजी से बढ़ रही है। खासतौर पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर बनाने वाले ग्रामीणों को इसका सीधा लाभ मिल रहा है। स्थानीय स्तर पर सस्ती और मजबूत ईंटें मिलने से उन्हें बाहर से ईंट मंगाने की जरूरत नहीं पड़ रही है। पहले पेवर ब्लॉक और ईंट निर्माण को पूरी तरह पुरुषों का काम माना जाता था। स्थानीय स्तर पर महिलाएं इस क्षेत्र में नजर नहीं आती थीं, लेकिन मां दंतेश्वरी कावेरी महिला समूह ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। अब महिलाएं न सिर्फ उत्पादन कर रही हैं, बल्कि बिक्री और हिसाब-किताब भी खुद संभाल रही हैं। इस पहल से महिलाओं को गांव छोड़कर बाहर मजदूरी करने की मजबूरी नहीं रही। वे अपने गांव में रहकर आत्मनिर्भर बन रही हैं और अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं।

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