राजधानी के समीप रायसेन जिले के बरेली में पचास साल पुराना पुल गिरने की घटना के बाद भी प्रशासन ने सबक नहीं लिया है। शहर के ज्योति टॉकीज चौराहे पर पत्थर की चुनाई से निर्मित लगभग 50 वर्ष पुराना नाला भी उन्हीं हालात से गुजर रहा है। पिछले साढ़े चार महीने से इसकी जर्जर स्थिति की जानकारी होने के बावजूद रोजाना पीक ऑवर में करीब 8000 वाहन और रात में 30 टन तक के वजनी ट्रक इसी पर से गुजर रहे हैं। बैरिकेड भी हटा लिए गए हैं, जिससे खतरा और बढ़ गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नाले की दीवार धंस गई तो यहां बड़ा हादसा हो सकता है। पत्थर की चुनाई की उम्र पूरी, संरचना कभी भी ढह सकती है
कौंसिल ऑफ कंसल्टिंग सिविल इंजीनियर्स के चेयरमैन एवं स्ट्रक्चर इंजीनियर डॉ. शैलेंद्र बागरे बताते हैं कि यह नाला उस समय बनाया गया था, जब बीएचईएल को शहर से जोड़ने के लिए सड़क की आवश्यकता थी। तब ट्रैफिक बहुत कम था, लेकिन समय के साथ यह प्रमुख जंक्शन बन गया और वाहन दबाव कई गुना बढ़ गया। पत्थर की चुनाई की अधिकतम उम्र 50 साल ही मानी जाती है, इसलिए यह संरचना किसी भी दिन धंस सकती है। 17 जुलाई को सड़क पर अचानक गड्ढा बनने के बाद एक सप्ताह के भीतर 24 जुलाई को दूसरी ओर दरारें भी दिखाई दी थीं, जो गंभीर स्थिति का संकेत हैं। चौथी बार में तीन एजेंसियों ने दिए ऑफर, 10 दिन में निर्णय पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर संजय मस्के के अनुसार बॉक्स कलवर्ट निर्माण के लिए चौथी बार निविदा निकाली गई, जिसमें तीन एजेंसियों ने ऑफर दिए हैं। इनका परीक्षण जारी है और दस दिन के भीतर निर्णय ले लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्थिति का पुन: निरीक्षण किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर फिर से बैरिकेडिंग लगाकर ट्रैफिक रोका जाएगा। विभाग जल्द से जल्द मरम्मत कार्य प्रारंभ करने का प्रयास कर रहा है। जर्जर नाले की जगह पर पीडब्ल्यूडी ने पारंपरिक पुलिया की बजाय प्री-कास्ट बॉक्स कलवर्ट बनाने का निर्णय लिया था, जिससे काम एक सप्ताह में पूरा हो सकता है और लागत भी लगभग डेढ़ करोड़ आती। लेकिन जुलाई से अब तक विभाग को इसके लिए कोई एजेंसी नहीं मिल पाई। पारंपरिक पुलिया बनानी होती तो सड़क को खोदकर तीन महीने तक बंद करना पड़ता, जो एमपी नगर और भेल को जोड़ने वाली मुख्य सड़क के लिए बड़ी समस्या बन सकता था। हादसा टालने समय रहते कार्रवाई की बहुत जरूरी बरेली की दुर्घटना प्रदेश के लिए चेतावनी है। यदि ज्योति टॉकीज जैसे अत्यधिक व्यस्त क्षेत्र में नाला धंसता है, तो इसके परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासन को तात्कालिक कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि किसी बड़े हादसे से पहले स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।


