भास्कर न्यूज | पटना रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर सर्व आदिवासी समाज ने पटना के नेशनल हाईवे क्रमांक 43 तिगड्डा चौक पर श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में नगर पंचायत अध्यक्ष गायत्री सिंह मुख्य अतिथि रहीं। अध्यक्षता आदिम जाति सेवा सहकारी समिति पटना के पूर्व अध्यक्ष ईश्वर दयाल सिंह ने की। विशिष्ट अतिथि राकेश प्रताप सिंह, विष्णु चेरवा, रविदास जनकल्याण समिति अध्यक्ष अशोक कुर्रे और बिमला सोनवानी रहे। कार्यक्रम में सर्व आदिवासी समाज के जिलाध्यक्ष विजय सिंह, संरक्षक ए पन्ना, उपाध्यक्ष रविन्द्र सिंह और सचिव विश्वास भगत मौजूद रहे। संचालन सुरेश एक्का ने किया। पार्षद प्रमिला सिंह, सुरेन्द्र, सुनील सिंह, संगीता सोनवानी, पारस सिंह, शिवरतन और स्वास्थ्य विभाग के अमृतलाल टुन्डे भी शामिल हुए। मुख्य अतिथि गायत्री सिंह ने कहा कि रानी दुर्गावती का वीरता भरा जीवन भारतीय इतिहास में दर्ज है। उन्होंने मुस्लिम शासकों के खिलाफ कड़ा संघर्ष किया। संरक्षक ए पन्ना ने बताया कि रानी दुर्गावती को जब भी किसी स्थान पर शेर दिखने की खबर मिलती थी, वे तुरंत शस्त्र लेकर शिकार पर निकल जाती थीं। जब तक शेर को मार नहीं लेती थीं, पानी भी नहीं पीती थीं। उन्होंने बताया कि रानी दुर्गावती का विवाह राजा संग्राम सिंह के पुत्र दलपत शाह से हुआ था। चार साल बाद दलपत शाह का निधन हो गया। उस समय उनका पुत्र नारायण मात्र तीन वर्ष का था। उसी समय रानी दुर्गावती ने गढ़ मंडला का शासन संभाल लिया। वर्तमान जबलपुर उनके राज्य का केंद्र था। विनोद शर्मा ने कहा कि रानी दुर्गावती सिर्फ आदिवासी समाज ही नहीं, सभी समाज की शुभचिंतक थीं। उन्होंने मुगलों से युद्ध करते हुए अपने राज्य और देश की रक्षा की और वीरगति को प्राप्त हुईं। वे बहुत बहादुर और साहसी थीं। पति की मृत्यु के बाद उन्होंने न केवल राज्य संभाला, बल्कि कई युद्ध भी लड़े।


