कांकेर में सर्व आदिवासी समाज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बस्तर क्षेत्र के महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया। जिलाध्यक्ष कन्हैया उसेंडी ने कहा कि सरकार द्वारा गठित टास्क फोर्स सिर्फ रोहिंग्या मुसलमानों की पहचान तक सीमित है। उन्होंने बताया कि बिना ग्रीन कार्ड वाले बांग्लादेशी लोग क्षेत्र में अवैध गतिविधियां कर रहे हैं। ये लोग जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं। जंगलों को नष्ट कर रहे हैं। आदिवासी लड़कियों से धोखे से विवाह कर उनके अधिकारों का दुरुपयोग कर रहे हैं। समाज ने मांग की है कि मुसाफिरी लिखवाने की प्रक्रिया को कड़ा किया जाए। शिक्षा के मुद्दे पर जिला प्रवक्ता तामेश्वर नाग ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की संख्या कम करने से शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होगी। एक शिक्षक और एक हेडमास्टर से अन्य प्रशासनिक कार्यों के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा संभव नहीं है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार बच्चों को स्थानीय भाषा में पढ़ाई करवाना आवश्यक है। नाग ने कहा कि अन्य जिलों से आने वाले शिक्षकों को हल्बी-गोंडी जैसी स्थानीय भाषाओं का ज्ञान नहीं है। इसलिए स्थानीय भाषा जानने वाले अधिक शिक्षकों की नियुक्ति जरूरी है। पारधी समाज के बच्चों की पढ़ाई का ध्यान दें
पारधी समाज के लोगों को आज तक जाति प्रमाण पत्र नहीं मिल पाया है, जिसकी वजह से उनके बच्चों की आठवीं कक्षा के बाद की पढ़ाई रुक जाती है। इसके अलावा, उन्हें शासकीय नौकरियों में भी शामिल होने का अवसर नहीं मिल पाता। सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए भी जाति प्रमाण पत्र जरूरी होता है, जो उन्हें अब तक नहीं मिल सका है। हाल ही में आदिम जाति विकास विभाग ने एक पत्र जारी कर कहा कि पारधी समाज की जाति से जुड़ी जानकारी उपलब्ध नहीं हो पाने के कारण प्रमाण पत्र जारी नहीं किए जा सके हैं। लेकिन यह एक गंभीर चिंता का विषय है कि आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी इस समुदाय की पहचान और अधिकार तय नहीं हो सके हैं। पेशा कानून का सही तरीके से हो क्रियान्वयन
सर्व आदिवासी समाज ने प्रशासन से मांग की है कि पारधी समाज की जाति प्रमाण पत्र संबंधी समस्या का जल्द समाधान किया जाए। इसके साथ ही, छात्रावासों और आश्रमों में बालिकाओं के साथ हो रही घटनाओं को लेकर प्रशासन को गंभीर होने की आवश्यकता बताई गई है। यह भी कहा गया कि ऐसी कार्य योजना बने जिससे बच्चों के भविष्य के साथ किसी प्रकार की लापरवाही न हो। पेशा कानून को लेकर समाज ने कहा कि इसका सही तरीके से क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए और इसमें प्रस्तावित संशोधनों को प्राथमिकता दी जाए। कानून की प्रभावी निगरानी और क्रियान्वयन के लिए सरकारी तंत्र में बेहतर समन्वय की आवश्यकता है। बस्तर की खदानों के निजीकरण पर जताई आपत्ति
सर्व आदिवासी समाज ने बस्तर क्षेत्र में खदानों के निजीकरण का विरोध करते हुए कहा कि यह जनहित के खिलाफ है। उन्होंने मांग की कि खनन कार्य केवल सार्वजनिक उपक्रमों के माध्यम से किया जाए, जिससे विकास के साथ-साथ स्थानीय लोगों की भागीदारी भी सुनिश्चित हो सके। समाज ने यह भी कहा कि निजी कंपनियों के हाथों में खनन कार्य देना क्षेत्रीय जनता की सुरक्षा और अधिकारों को नुकसान पहुंचा सकता है। इस प्रेस वार्ता में सर्व आदिवासी समाज के उपाध्यक्ष डी.आर. ध्रुव, हवा समाज के जिलाध्यक्ष प्रकाश दीवान, ब्लॉक अध्यक्ष विनोद शोरी, पारधी समाज के जिलाध्यक्ष भगवान सिंह शोरी, ध्रुव गोंड समाज प्रमुख रत्तू राम नेताम समेत अनेक समाजजन उपस्थित रहे।


