बस्तियों में मकान लेते, नाबालिगों को ऊंचे सपने दिखाते, झांसे में आते ही साथ ले जाकर बेच देते

{ पुलिस ने रैकेट पकड़ा, भास्कर पहुंचा पीड़ितों के पास { आपबीती बताई, ऐसे-ऐसे काम करवाए कि रुह कांप गई
{ पूछताछ में राजधानी से गायब लड़कियों का सुराग मिलने की उम्मीद { हर साल औसतन 500 लड़कियां गायब हो रहीं राजधानी में एक ऐसा गिरोह काम कर रहा है जो बस्तियों में रहने वाली नाबालिग लड़कियों को निशाना बना रहा है। इनके टारगेट में 15 से 17 साल की बच्चियां होती हैं जो घर से असंतुष्ट होने के साथ ही बाहर जाकर कुछ करना चाहती हैं। गिरोह में शामिल महिलाएं ऐसी बस्तियों में किराये का मकान लेती। पास-पड़ोस के घरवालों का भरोसा जीतती। इतना ही नहीं महिलाओं का गिरोह स्टेशन और बस स्टैंड में भी नजर रखते। वहां घर से भागी हुई लड़कियों को भी अपने निशाने में रखते। झांसे में लेने के बाद नाबालिगों को ऊंचे सपने दिखाते। उन्हें बताया जाता कि वे जैसा जीना चाहती हैं वो बेहद आसान है। बस उन्हें घर से निकलना पड़ेगा। ल​ड़कियां उनके झांसे में आ जाती। अपनी मर्जी से उनके साथ चली जाती। लेकिन बाहर जाते ही लड़कियों को एक से पांच लाख रुपए में बेच दिया जाता। पुलिस ने ऐसे गिरोह में काम करने वाली महिला और जिन्होंने लड़कियां खरीदी उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया है। नाबालिगों को बहला-फुसलाकर युवकों को बेचने वाली सुषमा पटेल को छापा मारकर छतरपुर में पकड़ा गया। वो रायपुर में कई बस्तियों में किराये का मकान लेकर नाबालिगों को बेच चुकी है। पुलिस कई महीने से उसकी तलाश कर रही थी। गिरोह में शामिल उसका भाई और एक अन्य आरोपी अब भी फरार है। फरार भाई के पकड़े जाने पर इसमें और कई नए खुलासे होंगे। हर बस्ती की जांच कर रहे
^ महिलाओं का इस तरह का गिरोह में शहर में कई जगहों पर काम कर रहा है। हम हर बस्तियों में जाकर लोगों को जागरूक करने के साथ ही एेसी महिलाओं की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर रहे हैं।
पूर्णिमा लांबा, सीएसपी 24 दिन ऐसे गुजारे जैसे काले पानी की सजा दी हो 16 साल की नाबालिग को छतरपुर में एक युवक को बेचा गया। वो जानवर काटने का काम करता था। 24 दिन तक उसकी कैद में रहने के बाद लड़की अब घर लौटी है। दैनिक भास्कर संवाददाता ने नाबालिग से जैसे ही बात करने की कोशिश की वो रो पड़ी। हमने उसे हिम्मत दिलाई। इसके बाद ही उसने बात करनी शुरू की। जैसा नाबालिग ने बताया हमने उसे वैसा ही लिखा: मैं बस्ती में अपने घरवालों के साथ रहती थी। घरवालों से कुछ बातों को लेकर नाराज थी। 21 फरवरी की शाम मैं घर छोड़कर रेलवे स्टेशन आ गई। वह प्लेटफार्म में अकेले बैठी थी। तभी मेरे बगल में सुषमा पटेल आ गई। वो इधर-उधर की बातचीत करने लगी। उसने कहा कि उसकी कोई संतान नहीं है। वो उसकी बेटी की तरह है। मैं उसके झांसे में आ गई। वो मुझे डोंगरगढ़ ले गई। दो दिन तक वहां रहने के बाद वो अपने भाई के साथ मुझे छतरपुर ले गई। वहां मुझे बेचने की कोशिश की, लेकिन ग्राहक नहीं मिला। फिर घूमने-फिरने का झांसा देकर राजस्थान ले गई। लेकिन वहां भी कोई खरीदार नहीं मिला। इसके बाद वापस छतरपुर आ गए। इस दौरान डरा-धमका रखते। कुछ दिन बाद छतरपुर के ही एक गांव में बबलू कसाई से सौदा कर लिया। 5 मार्च को सौदा हुआ और 8 मार्च को बबलू ने उन्हें एक लाख दिए। पैसा देने के बाद बाबूलाल अहिरवार (30) मुझे अपने घर ले आया। पत्नी बनाकर रखने लगा तो मैंने उसका विरोध किया। इसके बाद वो जबरदस्ती करने लगा। घर का हर काम करवाता। पानी लाने के लिए मुझे कई किलोमीटर पैदल चलकर जाना पड़ता। 30 मार्च को फोन कर भाई को पूरी बात बताई। भाई ने पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने 1 अप्रैल को रेस्क्यू कर मुझे छुड़ाया। बाबूलाल को पकड़ लिया।

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