भास्कर न्यूज | घाटशिला नारगा से बहरागोड़ा तक सड़क दुर्घटनाओं की घटनाएं आए दिन घट रही हैं। घायल मरीजों को समय पर उचित इलाज न मिलने के कारण उनकी मौत होना अब आम बात बन गया है। इसके बावजूद घाटशिला अनुमंडल अस्पताल और बहरागोड़ा में वर्षों पूर्व बने ट्रॉमा सेंटर (अभिघात केंद्र) अब तक चालू नहीं हो सके हैं। यह स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही को उजागर करता है। ट्रॉमा सेंटर कागजों में ही सीमित स्वास्थ्य विभाग ने केवल भवन निर्माण कर राशि खर्च तो कर दी, लेकिन इसे फंक्शनल बनाने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई। न तो आवश्यक तैयारियां की गईं और न ही उपकरणों व विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित कराई गई। नतीजतन, घाटशिला अनुमंडल अस्पताल का ट्रॉमा सेंटर इस वक्त क्षय रोगियों के इलाज और ड्रेसिंग रूम के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। पूर्व मंत्री की पहल अधर में पूर्व शिक्षा मंत्री व घाटशिला विधायक स्व. रामदास सोरेन ने डायलिसिस सेंटर के उद्घाटन अवसर पर अस्पताल प्रबंधन और सीएस को निर्देश दिया था कि एक महीने के भीतर घाटशिला और बहरागोड़ा ट्रॉमा सेंटर के संचालन के लिए जरूरी सूची तैयार कर दी जाए। सूची भी सौंपी गई थी और उम्मीद जगी थी कि अब दोनों ट्रॉमा सेंटर शुरू होंगे। लेकिन उनके निधन के बाद यह प्रक्रिया ठंडे बस्ते में चली गई। अब स्थानीय लोग नए विधायक से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि क्षेत्र में जनहित के इस अहम मुद्दे पर ठोस कदम उठाया जाए। सेंटर शुरू होने से होंगे बड़े फायदे ट्रॉमा सेंटर गंभीर सड़क दुर्घटनाओं, गिरने या हिंसक घटनाओं में घायल मरीजों को जीवन रक्षक आपातकालीन सुविधा उपलब्ध कराता है। यहां 24 घंटे विशेषज्ञ डॉक्टरों – न्यूरोसर्जन, हृदय रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, एनेस्थेटिस्ट व ट्रॉमा सर्जन की मौजूदगी रहती है। साथ ही ब्लड बैंक, डायग्नोस्टिक टेस्ट, ऑपरेटिंग रूम और फार्मेसी जैसी सुविधाएं भी होती हैं। इससे मरीजों को तुरंत उपचार मिल सकेगा और मौत व स्थायी विकलांगता की संभावना काफी हद तक घटेगी। स्थानीय लोगों की पीड़ा घाटशिला के कालीराम शर्मा ने कहा कि हर दिन सड़क दुर्घटनाओं में किसी न किसी की जान जाती है। यदि समय पर इलाज मिल जाए तो कई लोगों की जान बच सकती है। गालूडीह से बहरागोड़ा तक कहीं भी गंभीर मरीजों के लिए तुरंत उपचार की सुविधा न होना यहां के लोगों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। धालभूमगढ़ | सेवा ही धर्म सामाजिक संस्था द्वारा मानसिक रूप से बीमार कोकपाड़ा नरसिंहगढ़ गांव निवासी मोनू सिंह 41 तथा चोयरा गांव निवासी हेमन्त कुमार मुंडा 35 को मानवता की भावना से रांची स्थित मानसिक चिकित्सालय रिनपास में ले जाकर भर्ती करवाया गया। संस्था का यह प्रयास समाज के प्रति उसकी सेवा भावना और समर्पण को दर्शाता है।” इसमें पूर्व स्वस्थ मंत्री डॉ दिनेश षाड़ंगी तथा पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी के सहयोग पर सेवा ही धर्म सामजिक संस्था ने पहल की।


