जैसलमेर में पिछले हफ्ते शुक्रवार को बांकलसर गांव के खेत में हवा में उड़ते समय अचानक से नीचे गिरकर मरे 14 कुरजां पक्षियों की मौत बर्ड फ्लू से हुई है। भोपाल स्थित निषाद लैब भेजी दो कुरजां पक्षी की रिपोर्ट आने से पक्षियों में बर्ड फ्लू की पुष्टि हो गई है। ऐसे में यह स्पष्ट हो गया है कि बांकलसर में कुरजां की मौत का कारण बर्ड फ्लू ही था। इसके साथ ही जैसलमेर में अब तक बर्ड फ्लू से 33 कुरजां पक्षियों की मौत हो गई है। इसके अलावा एक कोयल और एक यूरेशियन वल्चर (गिद्ध) की मौत भी हुई थी मगर वो मौत सामान्य होने के कारण प्रशासन ने राहत की सांस ली है। 33 कुरजां की बर्ड फ्लू से मौत गौरतलब है कि 11 जनवरी से जैसलमेर में बर्ड फ्लू से लगातार पक्षियों की मौत रही है। हालांकि बर्ड फ्लू से मरने वाले पक्षी सिर्फ देगराय ओरण व बांकलसर में ही मिले है। जिले में दूसरी जगह पर अभी तक बर्ड फ्लू से संक्रमित कोई पक्षी नहीं मिला है। देगराय ओरण क्षेत्र में तालाब के किनारे मिले पक्षियों के शव प्रोटोकॉल से दफनाने के बाद उस जगह पर केमकिल स्प्रे का छिड़काव किया गया है। ताकि अन्य पक्षियों में यह संक्रमित बीमारी नहीं फैले। सर्दियों में ही फैलती है, सर्दी कम होने से संक्रमण घटेगा पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ उमेश वरगंटीवार ने बताया कि आमतौर पर इंसानों की तरह पक्षियों में भी सर्दी के मौसम में इम्यूनिटी कम हो जाती है। जिससे पक्षियों में यह संक्रमित बीमारी ज्यादा फैल जाती है। उन्होंने बताया कि पक्षियों को उड़ान भरने से तो रोक नहीं सकते। ऐसे में इस संक्रमित बीमारी की रोकथाम के कोई उपाय नहीं है। लेकिन इस बीमारी से बचाव के लिए जहां मृत पक्षी मिलते है, उन्हें सरकारी निर्देशों के अनुसार दफनाने के बाद उस जगह स्प्रे कर दिया जाता है। दूसरी जगह फैलने की आशंका कम डॉ उमेश के अनुसार इस बीमारी से ग्रसित पक्षी उड़ने में असक्षम हो जाता है। जिससे अगर इस बीमारी से कोई पक्षी ग्रसित हो जाता है तो वह दूसरे पक्षियों को संक्रमित नहीं कर सकता। हालांकि दूसरे पक्षी ही अगर उसके आस पास मंडराते रहते है तो उनके संक्रमित होने की पूरी संभावना है। वहीं मृत मिलने वाले पक्षियों की जगह कर्मचारियों द्वारा स्प्रे किया जा रहा है। तालाबों के पानी के उपयोग पर रोक प्रशासन द्वारा जिले में प्रवासी पक्षियों के डेरा डालने वाले तालाबों के पानी के उपयोग नहीं करने की अपील जारी की गई है। ताकि दूसरे पक्षियों में फैलने के अलावा यह बीमारी कम से कम इंसानों में नहीं फैले। इस बीमारी के इंसानों में फैलने की पूरी संभावना है। जिसके चलते ही तालाबों के पानी के उपयोग नहीं करने तथा गोडावण के संरक्षण के लिए डीएनपी के क्लोजरों में आमजन के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही ब्रीडिंग सेंटरों पर प्रोटोकॉल की सख्ती से पालना की जा रही है। बर्ड फ्लू का खौफ, कुरजां के बाद गिद्ध मरा मिला:जैसलमेर में अब दूसरे पक्षियों में बीमारी फैलने का खतरा; अब तक 32 की मौत एक और कुरजां पक्षी का शव मिला:अब तक 33 कुरजां पक्षियों की मौत, विभाग करवा रहा केमिकल का छिड़काव


