बांध टूटता तो हजारों लोगों की जान संकट में आती:आपदा प्रबंधन संस्थान और IIT में पढ़ाएंगे- कारम डेम फूटने के बाद कैसे टाली त्रासदी

अभी तक भ्रष्टाचार के कलंक के रूप में प्रचारित कारम डेम फूटने की घटना को अब राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान नई दिल्ली समेत देशभर के आईआईटी और राज्यों के आपदा प्रबंधन संस्थानों में सफलतापूर्वक आपदा टालने की कहानी के रूप में पढ़ाया जाएगा। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एनआईडीएम) ने कारम डेम में लीकेज से लेकर तोड़ने और आसन्न आपदा के प्रबंधन पर 100 पेज का दस्तावेज तैयार किया है। इसमें बताया गया है कि बांध निर्माण में कौन सी छोटी-छोटी लापरवाही भविष्य में बड़ी आपदा को न्योता दे सकती हैं और वक्त रहते सही निर्णय लेकर इन्हें कैसे ठीक किया जा सकता है। कारम डेम के टूटने से पहले उसके एक हिस्से को काटकर पानी निकालने के फैसले, सावधानियों और चुनौतियों के बारे में विस्तार से बताया है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उप संचालक दिलीप कुमार सिंह के मुताबिक घटना इतनी गंभीर थी कि प्रधानमंत्री मोदी खुद लगातार अपडेट लेते रहे। जब डेम से सुरक्षित पानी निकाल दिया, तब प्रधानमंत्री ने तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह को इस पूरे राहत और बचाव कार्य का दस्तावेजीकरण कराने का सुझाव दिया था। इसके बाद एनआईडीएम ने डिटेल रिपोर्ट तैयार की है। निर्माण में जल्दबाजी निकला कारण – डेम फूटने के बाद बांध निर्माण से जुड़े 8 इंजीनियरों को निलंबित किया गया था। लेकिन जांच पूरी होने से पहले ही सभी को फिर बहाल कर दिया गया। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में किसी को भी दोषी नहीं माना गया। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के मुताबिक ठेकेदार कंपनी ने आखिरी चरण में निर्माण पूरा करने में जल्दबाजी की, इस कारण मिट्‌टी और मुरम की लेयर बिछाने के बाद ठीक से रोलिंग नहीं की। इस कारण बांध में काम्पैक्शन ठीक से नहीं हो सका। अधिक बारिश के कारण इसमें पानी गया और बांध की मिट्‌टी की दीवार फूलकर दरकने लगी। रिसाव से फैल गई थी दहशत…. सरकार ने खाली करा दिए थे 18 गांव सरकार ने वर्ष 2022 में 10 अगस्त को बांध में रिसाव शुरू होने के बाद आनन-फानन में धार और खरगोन जिले के 18 गांव पूरी तरह खाली करा दिए थे। डेम के टूटने की स्थिति में इन गांवों के पूरी तरह बह जाने का खतरा था। 14 अगस्त 2022 को मिट्‌टी की दीवार को काटकर पानी खाली कराया गया था। एक सप्ताह एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तैनात रही थीं। कारम डैम की ऊंचाई 590 मीटर और ऊंचाई 52 मीटर थी, तब बांध में 15 एमसीएम पानी था। कारम डेम से रिसाव, तोड़-फोड़ और आपदा प्रबंधन का दस्तावेजीकरण एनआईडीएम ने किया है। एनआईडीएम में भी इसे शामिल कर लिया गया है। आपदा प्रबंधन से जुड़े देशभर के ट्रेनिंग और शैक्षणिक संस्थानों में ये स्टडी मटेरियल का हिस्सा होगा।
– प्रो. सूर्य प्रकाश, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान दिल्ली

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