दशहरा मेले की रंगीन रातें इस बार शब्दों की आग, हंसी की फुहार और वीरता के गीतों से भीगीं। नगर परिषद की ओर से शुक्रवार रात खेल मैदान में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन ने दर्शकों को देर रात तक थामे रखा। हास्य, श्रृंगार, गीत और वीर रस की कविताओं ने ऐसा जादू चलाया कि तालियों की गड़गड़ाहट बार-बार मंच पर गूंज उठी। शीश कट जाने पर धड़ लड़ जाते यहां… कवियत्री अनामिका जैन अंबर (मेरठ) जब मंच पर आईं तो जैसे पूरा पांडाल सनातन धर्म की गूंज में डूब गया। उन्होंने अपने चिरपरिचित ओजस्वी अंदाज में कहा- परम सत्ता से संचालित ये शासन मिट नहीं सकता… अमर है जो बुजुर्गों से, वो सनातन मिट नहीं सकता। भीड़ ने खड़े होकर तालियां बजाई और भारत माता की जय के नारे लगाए। बांसवाड़ा की रोहिणी पंड्या ने मां सरस्वती की वंदना के साथ मंच संभाला। वीर रस में उनका स्वर गूंजा-जर्रा-जर्रा गूंजता है वीरों की कहानियों में, शीश कट जाने पर धड़ लड़ जाते यहां। सलूंबर की हाडारानी की गाथा सुनाई। हंसी का रंग चढ़ा जब मुंबई से आए सुनील व्यास और ऋषभदेव के बलवंत बल्लू ने मंच संभाला। गांव की कच्ची दीवारों सुनील ने गांव की कच्ची दीवारों और रिश्तों की महक को शब्द दिए तो बल्लू ने समाज से सवाल किया शायद 21वीं सदी में जाओगे तो राखी किसी मशीन से बंधवाओगे… मां की ममता क्या बाजार से खरीद लाओगे?। वीर रस के कवि योगेंद्र शर्मा (भीलवाड़ा) ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर व्यंग्य कसते हुए कहा- हम किसानों का निवाला तक छुड़ाना चाहता है ट्रंप, पागल है हिमालय को झुकाना चाहता है। घास की रोटी चबाकर भी कभी झुकते नहीं हम। चंद्रयान से आगे बढ़कर सूर्ययान का भारत है… लखनऊ से आए कमल आग्नेय ने भारत की विश्वगुरु यात्रा पर जोश भरे शेर पढ़े- चंद्रयान से आगे बढ़कर सूर्ययान का भारत है… डर-डरकर जीना छोड़ दिया, ये स्वाभिमान का भारत है। हास्य का तड़का भी लगाया। भीलवाड़ा के दीपक पारीख ने मोबाइल की लत पर चुटकी लेते हुए कहा-3-3 बच्चों की मम्मियां भी देखो, कमर हिला हिलाकर फॉलोअर बढ़ा रही हैं। धार के जॉनी बैरागी ने जातिवाद पर चोट की जिसने सारा जगत बनाया, उसकी जात पूछ रहे हैं…। गीतकार स्वयं श्रीवास्तव (उन्नाव) ने गीतों से रंग भरे, जबकि सम्मेलन के सूत्रधार बृजमोहन तूफान ने अपने अंदाज से मंच को जीवंत बनाए रखा। करीब रात 10 बजे शुरू हुआ कवि सम्मेलन भोर तक चला।


