बांसवाड़ा में गीता जयंती महोत्सव का दो दिवसीय भव्य आयोजन आज से शुरू हो रहा है। वैदिक परंपरा, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, शोभायात्राओं और एक लाख दीपदान के साथ पहली बार भारत माता मंदिर परिसर रोशन होगा। वैदिक हवन के साथ महोत्सव का आगाज भगवदगीता का संदेश जन-जन तक पहुंचाने और भारतीय संस्कृति की गौरव परंपरा को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से बांसवाड़ा में आज से दो दिवसीय गीता जयंती महोत्सव शुरू होगा। परियोजना प्रमुख धर्मराज ने बताया कि महोत्सव का शुभारंभ वैदिक रीति से हवन यज्ञ के साथ होगा। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चारण और संगीतमय भक्ति कार्यक्रम महोत्सव में आध्यात्मिक वातावरण बनाएंगे। सांस्कृतिक प्रस्तुतियां बनेंगी आकर्षण का केंद्र महोत्सव में राजस्थान की लोक कलाओं पर आधारित रंगारंग प्रस्तुतियां मुख्य आकर्षण रहेंगी। विद्यालयों और महाविद्यालयों के विद्यार्थी समूह नृत्य, एकल नृत्य और ऑर्केस्ट्रा प्रस्तुत करेंगे। साथ ही पेंटिंग प्रतियोगिता भी रहेगी। कार्यक्रम में गीता पर आधारित शैक्षणिक सेमिनार आयोजित होगा, जिसमें विद्वान वक्ता गीता के सार और उसके व्यावहारिक जीवन संदेश पर विचार साझा करेंगे। भारत माता मंदिर परिसर में एक लाख दीपों का प्रकाश प्रांत सहसंयोजक करण सिंह ने बताया कि बांसवाड़ा में पहली बार इतने विशाल स्तर पर आयोजन हो रहा है। भारत माता की आरती में 10 हजार लोग शामिल होंगे और पूरा मंदिर परिसर 1 लाख दीपों से रोशन किया जाएगा, जो महोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण होगा। रविवार को खेल प्रतियोगिताओं और कलश यात्रा से कार्यक्रम आगे बढ़ेगा प्रचार प्रभारी यशवंत भावसार ने बताया कि रविवार सुबह 10 बजे कॉलेज स्टेडियम में दीप प्रज्वलन के बाद कबड्डी और रस्साकशी प्रतियोगिता शुरू होगी। दोपहर 1 बजे कुशलबाग मैदान से कलश यात्रा निकलेगी, जो भारत माता मंदिर मैदान में पहुंचेगी। शाम 4 बजे धर्मसभा आयोजित होगी और इसके साथ ही मेहंदी, मांडना, रंगोली और चित्रकला प्रतियोगिताएं होंगी। दीपदान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजेगी शाम सायं 7 बजे मुख्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उद्घाटन होगा। 7:15 बजे एक लाख दीपदान का आयोजन किया जाएगा। सांस्कृतिक कार्यक्रम रात 10 बजे तक चलेंगे, जिसके बाद 10:15 बजे भारत माता की महाआरती होगी, जिसमें हजारों लोग शामिल होंगे। सोमवार को शोभायात्रा और पूरी रात भजन-कीर्तन सोमवार को शाम 5 बजे छह विभिन्न स्थानों से भजन मंडलियों की शोभायात्रा पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ निकलेगी और भारत माता मंदिर पहुंचेगी। रात 8 से 10 बजे तक लोकगीत, भक्ति गीत, पारंपरिक नृत्य और धर्मसभा का आयोजन होगा, जिसमें संतों का प्रवचन भी होगा। इसके बाद रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक गवरी, गैर, भवई नृत्य और विभिन्न क्षेत्रों से आई भजन मंडलियों द्वारा भजन-कीर्तन का आयोजन पूरी रात चलता रहेगा।


