भास्कर न्यूज | बूंदी जिला मुख्यालय से 10 किमी दूर बागदा व लालपुरा के बीच 4 गांवों को पंचायत मुख्यालय से जोड़ने के लिए मांगली नदी पर 11 करोड़ 5 लाख की लागत से बन रहे हाईलेवल ब्रिज का काम जल्द ही पूरा होने वाला है। पीडब्ल्यूडी के अनुसार ब्रिज का 70 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। शेष काम मार्च-अप्रैल तक पूरा करने का लक्ष्य है। ब्रिज के पिलर कंप्लीट हो गए हैं। अब गडर डालकर स्लैब डालने का काम होगा। इसी के साथ दोनों तरफ अप्रोच सड़क का भी काम चल रहा है। ब्रिज बनने से आसपास की ग्रामीण आबादी को राहत मिलेगी। करीब 15 से 20 सालों से ग्रामीण पुल बनाने के लिए आंदोलन कर रहे थे। ग्रामीणों की मांग पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के प्रयास से पुल स्वीकृत हुआ था। पिछले साल इसका काम शुरू हुआ था, लेकिन जमीन अधिग्रहण और लंबे समय तक बरसात होने से कई दिनों तक काम बंद रहा। वर्तमान में काम तेज गति से चल रहा है। बागदा के ग्रामीण जगदीश गुर्जर, मुकेश मीणा ने बताया कि ग्रामीण कई सालों से नदी पर ब्रिज बनाने की मांग करते आ रहे हैं। गांव के लोगों के ज्यादातर खेत नदी पार हैं। बरसात के दिनों में नदी में ज्यादा पानी आने के बाद खेतों में भी आने-जाने में परेशानी होती है। ब्रिज का जल्द काम पूरा होना चाहिए, ताकि ग्रामीणों को सालों पुरानी समस्या से राहत मिले। ब्रिज बनने के बाद केशवरायपाटन तक के किसान सीधा लालपुर-बागदा होते हुए कृषि उपज मंडी आ सकेंगे। ^ब्रिज का काम तेज गति से चल रहा है। मार्च माह तक काम पूरा करने के लिए ठेकेदार को पाबंद किया है। अप्रैल में आवागमन शुरू करने का लक्ष्य है। अभी 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। – मुकेश गुप्ता, एसई, पीडब्ल्यूडी, बूंदी ब्रिज 103 मीटर लंबा, 12 मीटर चौड़ा व नदी की सतह से 15 मीटर ऊंचा बनाया जा रहा है। इसमें 4 पिलर व मिट्टी को रोकने के लिए दीवारें बनाई जा रही हैं। खेतों के पानी की निकासी के लिए 3 बॉक्स कल्वर्ट बनाए जाएंगे। ब्रिज बनने से 4 गांव बागदा, जालेड़ा, किशनपुरा, सखावदा के ग्रामीणों को पंचायत मुख्यालय लालपुरा पहुंचने के लिए मांगली नदी पार कर आना पड़ता है। सर्दी और गर्मी में तो पानी का लेवल कम होने से बागदा के पास जुगाड़ की पुलिया से निकलते हैं। लेकिन, बारिश के 4 महीने पंचायत मुख्यालय पहुंचने के लिए 7 हजार से ज्यादा ग्रामीणों को 25 किमी का अतिरिक्त चक्कर लगाकर जाना पड़ता है। ब्रिज बनने से पंचायत मुख्यालय से सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी। वहीं नदी पार लालपुरा के ग्रामीणों को बूंदी आने के लिए 25 के बजाय महज 10 किमी का ही सफर तय करना होगा। यानी 15 किमी कम चलना पड़ेगा।


