महासमुंद| खल्लारी माता मंदिर उस पहाड़ी के शीर्ष पर है, जो खल्लारी गांव (महासमुंद से करीब 25 किमी दक्षिण) में आता है। पूरे पहाड़ ने इन दिनों हरियाली की चादर लपेट ली है, जिससे माता का दरबार और भी खूबसूरत नजर आ रहा है। इस मंदिर तक पहुंचने पहाड़ी पर 842 से 850 सीढ़ियां बनाई गई हैं। चोटी से नीचे फैले जंगल, पहाड़ियां और आसपास का प्राकृतिक नजारा इस जगह को और भी जीवंत दिखाता है। यहां पहाड़ी पर बना मंदिर माता खल्लारी को समर्पित है। मान्यता है कि यहां देवी की कृपा से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। विशेषकर उन दंपतीयों की, जिन्हें संतान सुख नहीं है। हर साल चैत्र मास की पूर्णिमा पर यहां वार्षिक मेला लगता है, जिसमें दूर-दूर से भक्त शामिल होते हैं। ड्रोन फोटो : नुरेन्द्र साहू नवरात्रि के दौरान ज्योति कलश प्रज्वलित करने की शुरुआत 1985 में शुरू हुई थी। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस पहाड़ी को पहले खलवाटिका नाम से जाना जाता था। यह जगह कभी दक्षिणी कलचुरी वंश की राजधानी रही। कलचुरी वंश (लहुरी शाखा) के राजा हरि ब्रह्म देव की राजधानी रही थी। ऐसा भी माना जाता है कि महाभारत काल के दौरान पांडव इस पहाड़ी पर आए थे। यहां पर उस समय के रूप में भीम के पदचिन्ह आज भी पहाड़ी पर देखे जाते हैं।


