बाड़मेर का इनामी तस्कर चित्तौड़गढ़ में पकड़ा गया:एक फोटो से शुरू हुई तलाश, गिरफ्तारी के बाद SP ने टीम को दिया इनाम

चित्तौड़गढ़ जिले के पारसोली गांव से सोमवार को एक बड़ी कार्रवाई में NDPS एक्ट के आरोपी को गिरफ्तार किया गया। यह आरोपी बाड़मेर जिले में 10 हजार रुपए का इनामी वांटेड था। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद बाड़मेर पुलिस अधीक्षक नरेंद्र सिंह मीणा ने चित्तौड़गढ़ पुलिस टीम की सराहना की और उन्हें इनाम और प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया। पुलिस की इस विशेष टीम में छह सदस्य शामिल थे। इनमें कांस्टेबल राजदीप को सबसे ज्यादा 2500 रुपए का इनाम दिया गया। वहीं हेड कांस्टेबल भूपेंद्र सिंह, कांस्टेबल सुरेंद्र पाल, दीपक कुमार, विजय और विक्रम को 1500-1500 रुपए का इनाम दिया गया। इस पूरी टीम ने कई दिनों तक लगातार मेहनत कर आरोपी को पकड़ने में सफलता हासिल की। साल 2024 से बाड़मेर जिले में था वांटेड गिरफ्तार आरोपी का नाम शिवलाल उर्फ कमल पुत्र नारायणलाल गुर्जर है, जो चित्तौड़गढ़ जिले के लोहारिया, पारसोली गांव का रहने वाला है। आरोपी साल 2024 से बाड़मेर जिले में एक अफीम तस्करी के मामले में वांटेड था। बताया जा रहा है कि शिवलाल ने अफीम एक तस्कर को बेची थी, और उसी अफीम को उस तस्कर ने आगे बाड़मेर के एक अन्य व्यक्ति को बेच दिया था। यानी यह पूरा मामला अफीम की अवैध तस्करी से जुड़ा हुआ है। लंबे समय से कर रहा था तस्करी का काम पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि शिवलाल सिर्फ नशे के कारोबार में ही नहीं, बल्कि अवैध बजरी की सप्लाई में भी शामिल था। यानी आरोपी कई गैरकानूनी धंधों में लंबे समय से सक्रिय था। बाड़मेर पुलिस अधीक्षक नरेंद्र सिंह मीणा ने कुछ समय पहले चित्तौड़गढ़ पुलिस अधीक्षक को एक लिस्ट सौंपी थी, जिसमें ऐसे आरोपियों के नाम शामिल थे जो बाड़मेर में वांटेड हैं लेकिन चित्तौड़गढ़ जिले में रह रहे हैं। उसी सूची में शिवलाल का नाम भी था, और उस पर 10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया था। नहीं मिला लोकल सपोर्ट, फोटो के जरिए पहुंचे आरोपी तक इस सूचना के आधार पर चित्तौड़गढ़ एसपी ने तुरंत एक विशेष टीम का गठन किया और आरोपी को पकड़ने की जिम्मेदारी सौंपी। टीम ने लगातार कई दिनों तक गुप्त रूप से उसकी जानकारी जुटाने का काम किया। सबसे पहले पुलिस को आरोपी की एक फोटो हासिल करने में सफलता मिली, जो उसके पहचान की दिशा में पहला बड़ा कदम था। पुलिस की सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि स्थानीय लोगों ने किसी तरह की मदद नहीं की। आरोपी के गांव और आस-पास के लोग पुलिस को कोई जानकारी नहीं दे रहे थे। इसके बावजूद टीम ने अलग-अलग तरीकों से जानकारी जुटाने में लगी रही। आरोपी को पकड़ने के लिए पुलिस ने कई बार वेश बदलकर उसके ठिकानों की निगरानी की। टीम कई बार पूरे दिन एक ही जगह बैठी रही, लेकिन आरोपी वहां नहीं आया। एक बार पुलिस को खबर मिली कि आरोपी नवरात्रि के समय आयोजन स्थल आएगा, लेकिन पूरी रात इंतजार करने के बाद भी वह नहीं आया। ऐसे पुलिस की कोशिशें दो-तीन फेल हो गई। अचानक गांव जाने की मिली सूचना, पकड़ा गया आरोप फिर अचानक एक दिन पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी बाइक से अपने गांव की ओर जा रहा है। इस सूचना के बाद टीम ने तुरंत एक योजना बनाई। आरोपी के रास्ते पर पुलिस के जवान अलग-अलग स्थानों पर तैनात हो गए। जैसे ही आरोपी वहां पहुंचा, टीम ने उसे बिना किसी देरी के घेर लिया और मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। जांच में सामने आया कि आरोपी पिछले एक साल से अपना ठिकाना बदलता रहता था। कभी वह अपने रिश्तेदारों के घर तो कभी अपनी बहन या ससुराल में जाकर रुकता था। इसी वजह से पुलिस को उसका लोकेशन पकड़ने में काफी दिक्कत आई। अब आरोपी को बाड़मेर पुलिस को सौंप दिया जाएगा। बाड़मेर एसपी नरेंद्र सिंह मीणा ने चित्तौड़गढ़ की पुलिस टीम की कार्रवाई और मेहनत की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां भविष्य में अपराधियों के लिए बड़ा संदेश हैं कि चाहे वे कहीं भी छिप जाएं, पुलिस उन्हें ढूंढ निकालती है। चित्तौड़गढ़ पुलिस अधीक्षक ने भी अपना टीम को बधाई दी।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *