भास्कर न्यूज | अमृतसर बाढ़ की चपेट में आने से जिले के कुल 192 गांव प्रभावित हुए थे। जिनकी गिरदावरी बीते 13 सितंबर को शुरू कराई जा चुकी है। 4 दिनों की हुई गिरदावरी में जिले के 42 गांवों की फसल पूरी तरह से बर्बाद होने की रिपोर्ट सामने आई है। जिसमें अजनाला के 40 तो लोपोके के 2 गांव शामिल हैं। राज्य सरकार द्वारा गिरदावरी की रिपोर्ट 33 दिनों में फाइनल करके भेजने के आदेश जारी किए जा चुके हैं। जिसमें पटवारी से लेकर डीसी कितने दिनों में रिपोर्ट को अंतिम रूप देंगे इसका जिक्र भी किया गया है। आदेश में यह भी लिखा हुआ है कि 26 से 75% फसल बर्बादी पर 10 हजार रुपए तो 76 से 100% पर 20 हजार रुपए मुआवजा दिया जाएगा। घोनेवाल, माछीवाल, शहजादा, मंगुनारु, जट्टा, चक औल, पुंगा, भैणियां, सुंदरगढ़, तलवंडी राय दादू, धियां सिंह पुरा, महमद मंदरा वाला, पंडोरी, कोटली साहिब हबीब, निसोके, कमालपुर कलां, दादरा, कमालपुर खुर्द, कसोवाहला, अराजी कसोवाहला, अराजी सहारन, कोट गुरबख्श, तलाबपुरा, पशियां, शहारन, थोबा, मामानपुरा, कोटली जमीत सिंह, अवान नियर रमदास, माक्कोवाल, जस्सर, धनगाई, सुल्तान माहल, भंडाल, कल्लो माहल, समराए, मलकपुर, लंगरपुरा, दरिया मूसा, गग्गोमाहल के अलावा लोपोके के 2 गांव शामिल हैं। गिरदावरी तेजी से कराई जा रही है। पटवारियों, कानूनगो व रेवेन्यू अफसरों की ड्यूटी लगाई जा चुकी है। सरकार द्वारा जो भी समय-सीमा निर्धारित की गई है, रिपोर्ट भेज दी जाएगी। मदद के लिए प्रशासन 24 घंटे सेवाएं दे रहा हैं। -साक्षी साहनी, डीसी पटवारियों को 7 दिनों में रिपोर्ट देनी होगी। जबकि कानूनगो को प्रभावित क्षेत्रों में 25 फीसदी निरीक्षण के आधार पर और तहसीलदार-नायब तहसीलदार 10 फीसदी निरीक्षण के आधार पर 3 दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे। किसी भी तरह के एतराज दर्ज कराने को लेकर 5 दिन का समय दिया गया है। जबकि निपटारे के लिए पटवारियों, तहसीलदार, नायब तहसीलदार को 4 दिन का समय है। वहीं डीसी 3 दिनों में मूल्यांकन रिपोर्ट देंगी। जबकि डीसी की अगुवाई वाली कमेटी 5 दिनों में फैसला लेगी। वहीं डीसी की तरफ से भेजी गई डिमांड पर राज्य कार्यकारी कमेटी द्वारा 3 दिन में फैसला लिया जाएगा। बता दें कि गिरदावरी की रिपोर्ट फाइनल करने के लिए 3 दिनों का समय पटवारियों के पास बचा है। बता दें कि एक पटवारी को 3 गांवों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 192 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इनमें 127 गांवों में दूसरे तहसीलों से पटवारी लगाए गए हैं।


