बायोलॉजी 12वीं में ली तो योग्य छात्र को मिले एडमिशन:राजस्थान हाईकोर्ट का आदेश- 11वीं में लेना जरूरी नहीं; मेडिकल कॉलेज किया था इनकार

राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने NEET (UG) परीक्षा की योग्यता को लेकर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के मापदंड को स्पष्ट करते हुए एक अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी ने अपने रिपोर्टेबल जजमेंट में कहा है कि बायोलॉजी सब्जेक्ट 12वीं में पास करना काफी है, 11वीं में लेना अनिवार्य नहीं है। कोर्ट ने यह फैसला गोपालसिंह की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया है। कोर्ट ने NEET काउंसलिंग बोर्ड को स्पष्ट आदेश दिया है कि गोपाल का दस्तावेज सत्यापन एक सप्ताह के भीतर पूरा किया जाए। साथ ही, उसे बिना देरी के उन्हें MBBS कोर्स में प्रवेश दिया जाए। NEET में हासिल किए 99.43% अंक दरअसल, जोधपुर के तिंवरी में देवानिया निवासी गोपाल सिंह राजस्थान बोर्ड (RBSE) से पढ़े हैं। इन्होंने वर्ष 2019 में 12वीं की परीक्षा दी लेकिन कोविड-19 महामारी की वजह से परीक्षा में शामिल नहीं हो पाने पर गणित में असफल रहे। वर्ष 2020 में इन्होंने पूरक परीक्षा दी और बायोलॉजी को अतिरिक्त विषय के रूप में लिया। 30 सितंबर 2020 को घोषित परीक्षा परिणाम में गोपाल प्रथम श्रेणी के साथ पास हुए। गोपाल की मेहनत रंग लाई। NEET (UG) 2025 की परीक्षा में 720 में से 550 अंक हासिल कर इन्होंने 99.43 प्रतिशत प्राप्त किया। ऑल इंडिया रैंक 12,449 घोषित की गई और श्रीगंगानगर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश का आदेश दिया गया। गोपाल ने 13 अगस्त को 50,000 रुपये की सुरक्षा राशि भी जमा कर दी। लेकिन दस्तावेज सत्यापन के दौरान ही सब कुछ बदल गया। 1 अक्टूबर को आया सदमे वाला ईमेल गत 1 अक्टूबर 2025 को NEET काउंसलिंग बोर्ड की ओर से गोपाल को एक ईमेल भेजा गया। इसमें साफ शब्दों में कहा गया कि चूंकि गोपाल ने 11वीं में बायोलॉजी नहीं ली है, इसलिए वह सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए अयोग्य हैं। गोपाल की डॉक्टर बनने की सारी मेहनत एक शर्त पर आकर अटकती नजर आई। गोपाल ने जब यह बात दस्तावेज सत्यापन के समय अधिकारियों को बताई, तो अनौपचारिक तरीके से उनका अनुरोध खारिज कर दिया गया। NMC के दिशा-निर्देश समझ ढूंढा रास्ता यहीं गोपाल की मेहनत और सूझबूझ काम आई। उन्होंने 22 नवंबर 2023 को जारी NMC के सार्वजनिक सूचना को ध्यान से पढ़ा। इसमें स्पष्ट लिखा है कि 12वीं पास करने के समय भौतिकी, रसायन विज्ञान, बायोलॉजी और अंग्रेजी विषय के साथ छात्र NEET में शामिल हो सकते हैं। यह भी कहा गया है कि बायोलॉजी भले ही अतिरिक्त विषय के रूप में ली जाए, तब भी योग्य माना जाएगा। गोपाल ने NEET बोर्ड को यह बातें बार-बार ईमेल से समझाईं। लेकिन जवाब एक जैसा ही मिला- 11वीं में बायोलॉजी न होने के कारण आप अयोग्य हैं। कोर्ट ने लिया NMC का पक्ष गोपाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी की कोर्ट ने NMC के 22 नवंबर 2023 की सूचना को बारीकी से देखा। कोर्ट ने राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता की दलील सुनी। इसके बाद कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट लिखा- “यह बिल्कुल साफ है कि छात्र को 11वीं में बायोलॉजी लेना अनिवार्य नहीं है। केवल यह शर्त है कि 12वीं से भौतिकी, रसायन विज्ञान, बायोलॉजी और अंग्रेजी पास करने चाहिए। गोपाल ने 12वीं में भौतिकी, रसायन विज्ञान, अंग्रेजी और अतिरिक्त विषय के रूप में बायोलॉजी पास की है।” “बाद में” शब्द का भी सवाल कोर्ट ने एक और महत्वपूर्ण बात पकड़ी। NMC के 22 नवंबर 2023 के सूचना में कहा गया है कि विषय “12वीं पास करने के बाद” लिए जा सकते हैं। कोर्ट का सवाल था- 12वीं पास करने के बाद एक छात्र अतिरिक्त विषय परीक्षा में कैसे बैठ सकता है? यह तो 12वीं के दौरान ही संभव है। जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी ने कहा, “यह शब्द “बाद में” गलती से आ गया लगता है। असल मतलब यह है कि 12वीं पास करते समय विषय लिए जा सकते हैं।’ कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस गलती से योग्य छात्र को सजा नहीं दी जा सकती। मूल रेगुलेशन 1997 अब लागू नहीं है कोर्ट ने 14 जून 2023 को NMC की बैठक का हवाला दिया। इस बैठक में NMC ने फैसला किया था कि पुरानी चिकित्सा परिषद (1997 की रेगुलेशन) के कठोर नियम अब खत्म किए जा रहे हैं। नई रेगुलेशन में 2023 में लचक दी गई है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव किया गया था। एक सप्ताह में दस्तावेज सत्यापन करो कोर्ट ने NEET काउंसलिंग बोर्ड को एक सप्ताह में गोपाल के दस्तावेज सत्यापन करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि चूंकि गोपाल को तीसरे चरण की काउंसलिंग में श्रीगंगानगर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिल चुका है, इसलिए बिना देरी के उन्हें MBBS कोर्स में प्रवेश दिया जाए। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा- “NMC का 1 अक्टूबर 2025 का वह ईमेल जिसमें गोपाल को अयोग्य घोषित किया गया था, अब रद्द किया जाता है। यह आदेश मनमानी और किसी तर्क के बिना था।”

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