बारिश ने नाटक में डाला खलल, दूसरी जगह हुआ मंचन:नाटक बलि और शंभू में बुढ़ापे की पीड़ा और मानवीय संबंधों का किया मार्मिक चित्रण

आमेर के नाटकवाला कला मंच की ओर से मानव कौल लिखित प्रसिद्ध नाटक ‘बलि और शंभू’ का प्रभावी मंचन हुआ। इस नाटक का निर्देशन ओम प्रकाश सैनी ने किया। यह समाज को ओल्ड एज होम में रहने वाले बुजुर्गों की भावनाओं, संघर्षों और रिश्तों की सच्चाई का आइना दिखाने वाला मंचन साबित हुआ। बारिश की वजह से इस प्रस्तुति का वेन्यू चेंज करना पड़ा। कलाकारों ने आमेर में ही दूसरी जगह पर इस नाटक को उत्साह के साथ प्रस्तुत किया। ‘बलि और शंभू’ दो बुजुर्गों की कहानी है। इनमें से एक अपनी बेटी की मृत्यु के बाद अकेला वृद्धाश्रम में रहने को मजबूर है। दूसरा अपने घर से निकाल दिया गया है। प्रारंभ में दोनों में बिल्कुल नहीं बनती, लेकिन समय के साथ वे न केवल दोस्त बनते हैं बल्कि अपने जीवन के दर्द और हंसी-खुशी को साझा करते हुए एक-दूसरे का सहारा बन जाते हैं। शुभांकर अपनी गलतियों के लिए शंभू से माफी मांगना चाहता नाटक का भावनात्मक पक्ष तब चरम पर पहुंचता है, जब शंभू की मौत के बाद बलि अपनी दोस्ती के वचन को निभाते हुए शंभू के दामाद शुभांकर से खुद को शंभू बताकर मिलता है। शुभांकर, जो वर्षों से अपनी गलतियों के लिए शंभू से माफी मांगना चाहता था, बलि के साथ अपने दर्द को साझा करता है। इस मुलाकात के बाद बलि को पता चलता है कि शुभांकर पहले ही शंभू की मृत्यु का सच जान चुका था, लेकिन उसने इसे जाहिर नहीं किया। नाटक में बुजुर्गों की अकेलेपन की पीड़ा, माता-पिता और बच्चों के बीच के बदलते रिश्ते, और बुढ़ापे में दोस्ती के सहारे को बड़ी संवेदनशीलता से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों की प्यारी नोक-झोंक और गंभीर संवादों ने दर्शकों को भावुक कर दिया। मंचन ने यह संदेश दिया कि माता-पिता से बच्चों की बढ़ती अपेक्षाएं और उपेक्षा कैसे उन्हें अकेलेपन और दर्द की ओर धकेल देती हैं। नाटक में मुख्य भूमिकाएं निभाने वाले कलाकारों में अंकित शर्मा, उमेश सिरसाट, मानवेन्द्र सिंह, वाज्ञा गुप्ता, लवीना, ओम प्रकाश सैनी, आरोही, अवनी सैनी, युग शामिल थे।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *