बालक उमा विद्यालय नारायणपुर में अब बालिकाएं भी पढ़ सकेंगी

भास्कर न्यूज| नारायणपुर जिले के सबसे प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक शैक्षणिक संस्थान, शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नारायणपुर में शिक्षा के क्षेत्र में एक नया और सराहनीय कदम उठाया गया है। सत्र 2025–26 से सह-शिक्षा व्यवस्था को पुनः लागू की जा रही है, जिससे बालिकाओं को भी इस विद्यालय में पढ़ाई का अवसर मिलेगा। यह पहल राज्य शासन के निर्देशानुसार और शाला प्रबंधन समिति की सर्वसम्मति से की गई है। इस विद्यालय की स्थापना वर्ष 1956 में हुई थी और यह नारायणपुर जिले का सबसे पुराना और प्रतिष्ठित विद्यालय माना जाता है। पूर्व में यहां सह-शिक्षा की व्यवस्था थी, लेकिन विगत कुछ वर्षों से यह केवल बालकों के लिए आरक्षित विद्यालय बन गया था। विद्यालय के प्राचार्य मनोज बागड़े ने बताया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान देना नहीं है, बल्कि समान अवसर उपलब्ध कराना भी है। इसीलिए हमने यह निर्णय लिया कि अब बालिकाएं भी हमारे विद्यालय में अध्ययन कर सकें। उन्होंने आगे बताया कि इस निर्णय को शाला प्रबंधन एवं विकास समिति द्वारा पूर्ण सहमति से पारित किया गया है। इस निर्णय से न केवल क्षेत्र की बालिकाओं को उनके नजदीक ही उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्राप्त होगी, बल्कि यह कदम लड़कियों के लिए उच्चतर माध्यमिक शिक्षा को सुगम और सुलभ बनाएगा। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, पालकों और विद्यार्थियों ने इस फैसले का स्वागत किया है। यह निर्णय न केवल शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन है, बल्कि यह लैंगिक समानता और समावेशी शिक्षा व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। स्वच्छ शौचालय, सुरक्षा व्यवस्था और महिला शिक्षकों की उपस्थिति जैसे आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं । इन कक्षाओं में मिलेगा बालिकाओं को प्रवेश कक्षा 11वीं – सभी संकायों में (कला, विज्ञान, कृषि एवं वाणिज्य, व्यावसायिक शिक्षा (आईटी एवं हेल्थ केयर ) कक्षा 12वीं – सभी संकायों में (कला, विज्ञान, कृषि एवं वाणिज्य, व्यावसायिक शिक्षा (आईटी एवं हेल्थ केयर )

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