बालाघाट के उत्तर सामान्य वन परिक्षेत्र लामता के महकापाठा बीट में ‘अनुभूति कार्यक्रम’ का आयोजन किया गया। इस शिविर में लामता, बुढ़ियागांव, चांगोटोला और बसेगांव के 112 स्कूली बच्चों को जंगल और वन्यजीवों के करीब लाकर पर्यावरण संरक्षण का पाठ पढ़ाया गया। जंगल भ्रमण और ‘मैं हूं बाघ’ थीम पर चर्चा कार्यक्रम की थीम ‘मैं हूं बाघ’ और ‘हम हैं धरती के दूत’ रखी गई थी। वनकर्मियों ने बच्चों को जंगल का भ्रमण कराया और पेड़-पौधों, औषधीय वनस्पतियों व वन्यजीवों के पगमार्ग (पैरों के निशान) की पहचान करना सिखाया। अधिकारियों ने बताया कि पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने के लिए बाघों का सुरक्षित होना क्यों जरूरी है। प्रकृति की रक्षा का संकल्प लिया इस दौरान वन परिक्षेत्र अधिकारी देवेंद्र रंगारे ने बच्चों को समझाया कि जंगल ही ऑक्सीजन, जल और वर्षा का मुख्य आधार हैं। कार्यक्रम के अंत में सभी छात्र-छात्राओं ने ‘धरती के दूत’ के रूप में पर्यावरण और वन्यजीवों की रक्षा करने की शपथ ली। विभाग का उद्देश्य बच्चों को कम उम्र से ही प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाना है। देखें तस्वीरें..


