बालाघाट जिले के लांजी के शासकीय सीनियर अनुसूचित जाति बालक छात्रावास में रह रहे दो नाबालिग भाई बीमार होने पर खुद ही अस्पताल पहुंच गए। इस घटना के सामने आने के बाद छात्रावास अधीक्षक पर बच्चों की उपेक्षा और लापरवाही के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले को लेकर क्षेत्रीय विधायक राजकुमार कर्राहे ने नाराजगी जताते हुए कार्रवाई की बात कही है। विधायक के संरक्षण में रह रहे हैं दोनों भाई जानकारी के अनुसार प्रियांश और उसका छोटा भाई रियाल भीमटे कोरोना काल में अपने पिता को खो चुके हैं। मां की मानसिक स्थिति ठीक न होने के कारण दोनों बच्चे बेसहारा हो गए थे। इसके बाद विधायक राजकुमार कर्राहे ने उनकी जिम्मेदारी ली और पढ़ाई के लिए उन्हें लांजी के शासकीय छात्रावास में भर्ती कराया था। बीमार होने पर खुद पहुंचे अस्पताल बुधवार को बड़े भाई प्रियांश को तेज बुखार आ गया। वहीं उसका छोटा भाई रियाल सिलकसेल बीमारी से पीड़ित है। दोनों बच्चों ने बिना किसी सहायता के खुद लांजी अस्पताल पहुंचकर इलाज कराया। आरोप है कि बच्चों के बीमार होने की जानकारी मिलने के बाद भी छात्रावास अधीक्षक दो दिन तक अस्पताल नहीं पहुंचे। बिसोनी के उपसरपंच पवन कश्यप ने बताया कि जब इस संबंध में छात्रावास अधीक्षक पुरुषोत्तम भीमटे से सवाल किया गया, तो उन्होंने व्यस्तता का हवाला दिया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का आरोप है कि अधीक्षक बच्चों को छात्रावास का नियमित विद्यार्थी नहीं मानते और विधायक के कहने पर उन्हें रखना अपनी मजबूरी बताते हैं। सामान्य बच्चों जैसा व्यवहार नहीं करते छात्र प्रियांश ने बताया कि छात्रावास में उनके साथ सामान्य बच्चों जैसा व्यवहार नहीं किया जाता। उसका कहना है कि चूंकि उनका नाम छात्रावास की दर्ज संख्या में नहीं है, इसलिए उन्हें उपेक्षा का सामना करना पड़ता है। प्रियांश ने यह भी आरोप लगाया कि अधीक्षक रोज शाम 5 बजे या उससे पहले अपने पालडोंगरी स्थित घर चले जाते हैं और छात्रावास कर्मचारियों के भरोसे छोड़ दिया जाता है। विधायक बोले- ऐसा व्यवहार किसी भी हालत में स्वीकार नहीं विधायक राजकुमार कर्राहे ने इस पूरे मामले को बेहद दुखद बताया। उन्होंने कहा कि दोनों बच्चों की पूरी जिम्मेदारी वह स्वयं उठा रहे हैं और उच्च अधिकारियों से चर्चा कर उन्हें छात्रावास में रखा गया था। विधायक ने कहा कि छात्रावास अधीक्षक का ऐसा व्यवहार किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा और उन्हें हटाने के लिए विभाग को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई की मांग की जाएगी।


