बालाघाट में जनवरी के पहले दिन से ही सुबह घना कोहरा और बदली छाई हुई है। शीतलहर के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे ठिठुरन बढ़ गई है। सुबह के समय बालाघाट में आसमान बादलों से ढका रहा, वहीं वैनगंगा नदी और मोती तालाब के किनारों पर घना कोहरा देखा गया। ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा ले रहे लोग मौसम में आए इस बदलाव से आम जनजीवन प्रभावित हुआ है। लोग ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा ले रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने भी लोगों के लिए एडवाइजरी जारी की है, जिसमें अत्यधिक आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने, गर्म कपड़े पहनने और मौसम के अनुसार खान-पान पर ध्यान देने की सलाह दी गई है। अधिकारी बोले-इतनी ठंड से फसलों को नुकसान नहीं होगा बदलते मौसम का असर खेतों में लगी चना, गेहूं, सरसों, उड़द और तुवर जैसी फसलों पर पड़ने की आशंका है। हालांकि, कृषि विभाग के अधिकारियों ने फिलहाल बड़े नुकसान की संभावना से इनकार किया है। कृषि विभाग के उपसंचालक फूलसिंह मालवीय ने बताया कि अभी फसलों को नुकसान की संभावना नहीं है, क्योंकि वे फूल या फल की अवस्था में नहीं हैं। अरहर की फसल पकने की अवस्था में है, उसे भी कोई नुकसान नहीं है। चने की फसल अभी छोटी अवस्था में है, जिसमें इल्ली का प्रकोप देखने को नहीं मिला है।
फसलों में इल्ली का प्रकोप बढ़ने की जताई आशंका मालवीय ने कहा कि यदि मौसम ऐसा ही बना रहता है, तो फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले आंकड़ों के अनुसार इस मौसम में इल्ली का प्रकोप बढ़ता है, लेकिन चूंकि किसानों ने अभी चना बोया ही है, इसलिए इल्ली का प्रकोप तभी बढ़ सकता था जब फसल ग्रोथ या फूल की अवस्था में होती है। ठंड से धान की उपज खराब होने की आशंका जिले में चल रहे धान उपार्जन कार्य पर भी मौसम के इस बदलाव का असर देखा जा रहा है। उपार्जन केंद्रों पर खुले में पड़ी धान के परिवहन की गति धीमी होने के कारण, खराब मौसम में उसे नुकसान होने का खतरा है। हालांकि सहकारी बैंक प्रबंधक और नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों ने बताया कि उपार्जन केन्द्रों में केन्द्र प्रभारियों को मौसम को देखते हुए खुले में पड़े धान को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए है। एक जानकारी के अनुसार धान उपार्जन में आज तक 46 लाख 54 हजार 210 क्विंटल धान की खरीदी की जा चुकी है। इसमें से 35 लाख 71 हजार 520 क्विंटल धान का परिवहन किया गया है, जबकि अभी भी 11 लाख क्विंटल से ज्यादा धान खुले में पड़ा है।


