छिंदवाड़ा जिले में कोल्ड्रीफ कफ सिरप के सेवन से बच्चों की मौत के बाद, शासन और प्रशासन ने कोल्ड्रीफ कफ सिरप और नेस्ट्रो-डीएस सस्पेंशन के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके साथ ही, कोल्ड्रीफ बनाने वाली कंपनी श्रीसन फार्मास्युटिकल्स के सभी उत्पादों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। बालाघाट में सोमवार देर रात तक इन प्रतिबंधित उत्पादों को फ्रीज करने की कार्रवाई जारी रही। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. परेश उपलप, ड्रग निरीक्षक जयप्रकाश और खाद्य विभाग की संयुक्त टीम ने बालाघाट जिले के होलसेलरों महावीर मेडिकल एजेंसी, जायसवाल मेडिकल और ज्ञान मेडिकल पर कार्रवाई की। टीम ने कंपनी के अन्य उत्पादों की बिक्री पर रोक लगा दी है। स्वास्थ्य विभाग अब कंपनी के बेचे गए अन्य उत्पादों को वापस मंगवा रहा है। कलेक्टर मृणाल मीणा ने सीएमएचओ और ड्रग निरीक्षकों को जिले के सभी मेडिकल स्टोर्स की जांच करने और कोल्ड्रीफ कफ सिरप तथा नेस्ट्रो-डीएस सस्पेंशन के रिकॉर्ड खंगालने के निर्देश दिए हैं। इसके अतिरिक्त, एसडीएम और तहसीलदारों को भी अपने-अपने क्षेत्रों के मेडिकल स्टोर्स में इन प्रतिबंधित दवाओं का स्टॉक जांचने और इनका विक्रय रोकने के निर्देश दिए। 16 सैंपल लिए सोमवार देर रात तक चली कार्रवाई में कुल 16 सैंपल लिए गए। खाद्य विभाग ने कंपनी के 8 खाद्य उत्पादों के सैंपल लिए, जिनमें प्रोटीन पाउडर और मल्टीविटामिन सिरप शामिल हैं। वहीं, ड्रग विभाग ने 8 दवाओं के सैंपल एकत्र किए, जिनमें इस्मॉल-एएफ, इस्मॉल-थ्री प्लस, रेडर टैबलेट, मोनटेरेस किड, कोल्ड्रीफ टैबलेट और रेस्पोलाइट सिरप प्रमुख हैं। जिले में उपलब्ध नहीं सीएमएचओ डॉ. परेश उपलप ने बताया कि छिंदवाड़ा घटना में जिस बैच नंबर के कोल्ड्रीफ कफ सिरप का उल्लेख किया गया है, वह जिले में उपलब्ध नहीं है। हालांकि, शासन के निर्देशों का पालन करते हुए कंपनी की सभी दवाओं को फ्रीज किया जा रहा है। इन सभी के सैंपल जांच के लिए भेजे जा रहे हैं, ताकि फार्मास्युटिकल्स कंपनी के अन्य उत्पाद गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं।


