भास्कर न्यूज | तमता पत्थलगांव विकासखंड के बालाझर गांव में बुधवार को गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर ग्रामीणों ने पारंपरिक रूप से इंद्र देव की सामूहिक पूजा-अर्चना की। यह आयोजन वर्षों से चली आ रही एक प्राचीन परंपरा का हिस्सा है, जिसमें ग्रामीण हर साल एकत्र होकर अच्छी वर्षा, समृद्ध फसल और प्राकृतिक संतुलन के लिए इंद्र देव से प्रार्थना करते हैं। ग्रामवासी वेणु राम यादव ने बताया कि इंद्र देव को देवताओं का राजा और वर्षा के अधिपति के रूप में पूजा जाता है। उन्होंने कहा, “हम हर साल इस समय इंद्र देव की पूजा करते हैं, ताकि समय पर वर्षा हो और हमारे खेतों में फसल अच्छी हो। यह परंपरा हमारे बुजुर्गों से चली आ रही है और हम इसे पूरी श्रद्धा से निभाते हैं।” पूजा का आयोजन विधि-विधान से किया गया। पंडित बिहारी लाल शर्मा ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा संपन्न कराई और “ॐ इंद्राय नमः” मंत्र का सामूहिक जाप कराया। पूजा के बाद हवन का आयोजन किया गया, जिसे ग्रामीणों ने विशेष महत्व का बताया। मान्यता है कि हवन से वातावरण शुद्ध होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे गांव में सुख-शांति बनी रहती है। ग्रामीणों का यह भी मानना है कि इंद्र देव की पूजा प्राकृतिक आपदाओं से भी बचाव करती है। विजय नेताम ने बताया कि “जब भी इस पूजा का आयोजन होता है, उसके बाद अच्छी वर्षा होती है, जिससे हमें यह विश्वास होता है कि इंद्र देव प्रसन्न हुए हैं।” पूजा और हवन के बाद सभी ग्रामीणों के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया। आयोजन में गाँव के सरपंच हीर नाथ दिवान, सरदार सिंह, जमीन साय, वेद राम, बोधन राम सहित गांव के सभी बुजुर्ग और बड़ी संख्या में ग्रामीण जन शामिल हुए। ग्रामीणों ने इस परंपरा को सामूहिक एकता, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक जागरूकता का प्रतीक बताया। इस अवसर पर बच्चों और युवाओं की भी विशेष भागीदारी रही, जिससे यह आयोजन केवल धार्मिक न होकर सामाजिक एकता और सांस्कृतिक संरक्षण का संदेश भी दे गया।


