बालोतरा ज्ञानशाला में मर्यादा महोत्सव:तेरापंथ भवन में हुआ कार्यक्रम, नाटक से मर्यादा स्वरूप दिखाया

बालोतरा के न्यू तेरापंथ भवन में रविवार को सामूहिक ज्ञानशाला में मर्यादा महोत्सव कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथ महासभा और राष्ट्रीय ज्ञानशाला प्रकोष्ठ के निर्देशानुसार, स्थानीय संयोजक मोहन बाफना के तत्वावधान में हुआ। इसमें शासन साध्वी सत्यप्रभा ठाणा-3 का सानिध्य प्राप्त हुआ। विकास का आधार मर्यादाएं साध्वी सत्यप्रभा ने अपने उद्बोधन में कहा कि परिवार, धर्म संघ, समाज या राष्ट्र, सभी के विकास का आधार मर्यादाएं हैं। जो व्यक्ति मर्यादाओं को सहर्ष स्वीकार करता है, वह न केवल अपना विकास करता है, बल्कि अपने संघ को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाता है। मुख्य प्रशिक्षक रानी बाफना ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ अर्हम ज्ञानशाला के बच्चों द्वारा भिक्षु आरती के सुंदर मंगलाचरण से हुआ। इसके बाद, अहिंसा ज्ञानशाला के छोटे बच्चों ने ज्ञान मित्र द्वारा निर्देशित मर्यादा महोत्सव पर एक लघु एवं प्रेरणादायक नाटक प्रस्तुत किया। बच्चों को मर्यादाएं याद करने की प्रेरणा दी तेरापंथ की पांच मौलिक मर्यादाएं मोक्ष बालड और आरुष गौलेछा द्वारा सुनाई गईं, जिसे सभी बच्चों ने दोहराया। बच्चों को मर्यादाएं याद करने की प्रेरणा दी गई। अपरिग्रह ज्ञानशाला से ‘डोरेमोन का गैजेट्स’ नामक नाटिका के माध्यम से बच्चों को मर्यादाओं के जीवन में महत्व के बारे में बताया गया। अरिहंत ज्ञानशाला ने एक नाटक के जरिए मर्यादा महोत्सव के स्वरूप को दर्शाया, जिसमें बताया गया कि मर्यादाएं कैसे बनीं और उन्हें महोत्सव का रूप कैसे दिया गया। ज्ञानार्थी रीत भंडारी ने एक कविता भी प्रस्तुत की। परीक्षा परिणाम की घोषणा शिशु संस्कार बोध परीक्षा व्यवस्थापिका कविता सालेचा ने परीक्षा के परिणाम घोषित किए और सभी सफल बच्चों को बधाई दी। मुख्य प्रशिक्षक रानी बाफना ने सामूहिक रूप से श्रावक निष्ठा पत्र का वाचन किया। इस अवसर पर ज्ञानशाला उप संयोजक अयोध्या देवी ओस्तवाल, पूर्व मुख्य प्रशिक्षक उर्मिला की सालेचा सहित लगभग 45 प्रशिक्षक और लगभग 225 बच्चे उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन ममता गोलेछा ने किया, जबकि सह प्रशिक्षक संगीता बोथरा ने आभार व्यक्त किया।

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