छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में 1 महीने बाद दफन भालू के शव को बाहर निकाला गया। इस मामले में दैनिक भास्कर की पड़ताल से बड़ा खुलासा हुआ है। भास्कर की निशानदेही पर संदिग्ध परिस्थितियों में गायब भालू के मामले में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। भालू के चारों पंजे शरीर से कटे हुए मिले, जो जमीन पर केवल आठ इंच नीचे दबे थे, जबकि शव साढ़े तीन फीट गहराई में दफन था। इस रहस्यमयी परिस्थिति ने पूरे मामले को और उलझा दिया है। वहीं, गुंडरदेही विधायक कुंवर सिंह निषाद ने शुक्रवार को विधानसभा में भालू की संदिग्ध मौत का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। एसडीओ डिंपी बैस ने बताया कि भालू के पंजे किसी धारदार हथियार से काटे गए या किसी अन्य वजह से अलग हुए, यह फॉरेंसिक जांच के बाद स्पष्ट होगा। बांध के पानी में मिला था भालू का शव दरअसल, पूरा मामला 24 फरवरी का है, जब तांदुला डेम में मछलीपालन की निगरानी कर रहे चौकीदारों को बांध के पानी में संदिग्ध हालात में भालू का शव मिला। शव कथित तौर पर वन विभाग को सौंपा गया था, लेकिन इसके बाद वह रहस्यमय तरीके से गायब हो गया। दैनिक भास्कर ने जब वन विभाग और पशु चिकित्सा विभाग के रिकॉर्ड खंगाले, तो इस वर्ष भालू की मौत से जुड़ा कोई भी आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं मिला। भालू के पंजे फॉरेंसिक जांच के लिए जबलपुर भेजे गए बालोद जिला मुख्यालय से 31 किमी दूर कल्लूबाहरा (घोटिया) के जंगल में शनिवार सुबह वन विभाग और पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने भालू के शव को बाहर निकाला। शव परीक्षण से पहले टीम ने आसपास से भालू के बाल और मिट्टी के सैंपल एकत्र किए। खुदाई के दौरान भालू के कटे हुए पंजे भी बरामद हुए, जिन्हें जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए वन विभाग को सौंप दिया गया। वन विभाग ने मौके पर पंचनामा तैयार कर पंजों को जांच के लिए जबलपुर भेजने की प्रक्रिया शुरू की। आर्गन हुए डीकंपोज, पीएम करना संभव नहीं था वेटरनरी विभाग के डॉक्टर सोमेश जोशी ने बताया कि जब भालू के शव को बाहर निकाला गया, तो उसके आंतरिक विसरल ऑर्गन पूरी तरह डीकंपोज हो चुके थे, जिससे पोस्टमार्टम संभव नहीं था। शव पोस्टमार्टम के लिए अनफिट था, लेकिन फॉरेंसिक जांच कराई जा सकती है। इसके लिए हमने सैंपल एकत्र कर विभाग को सौंप दिए हैं। मौत का कारण 30 दिनों में पता चलेगा – SDO बालोद एसडीओ (वन) डिंपी बैस ने बताया कि भालू के पंजे किसी धारदार हथियार से काटे गए या किसी अन्य वजह से अलग हुए, यह फॉरेंसिक जांच के बाद स्पष्ट होगा। भालू की मौत के सही कारणों का पता लगाने के लिए सैंपल एकत्र कर जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। रिपोर्ट आने में करीब 30 दिन लगेंगे, जिसके बाद पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। डिप्टी रेंजर और तीन बीट गार्ड को नोटिस डीएफओ बलभद्र सरोटे ने इस मामले में हरठिमा के डिप्टी रेंजर भूषण लाल ढीमर सहित नैकिनकुंआ, हरठिमा और मालगांव मुल्ले के बीट गार्ड को नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा है। विधानसभा में गूंजा भालू की मौत का मामला गुंडरदेही विधायक कुंवर सिंह निषाद ने शुक्रवार को विधानसभा में भालू की संदिग्ध मौत और वन विभाग की लापरवाही का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। वहीं, दुर्ग में वन्यजीव और पर्यावरण प्रेमियों ने मुख्य वन संरक्षक को आवेदन सौंपकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।


