बालोद में मजदूर दिवस के अवसर पर कांग्रेस ने राजीव भवन में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। इस दौरान विधायक संगीता सिन्हा ने श्रमिकों के साथ बोरे बासी खाकर उनका सम्मान किया। विधायक संगीता सिन्हा ने कहा कि बोरे बासी खाना छत्तीसगढ़ की संस्कृति का हिस्सा है। पहले मजदूर अपने टिफिन में बासी खाना लेकर जाते थे। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस परंपरा को श्रमिकों के सम्मान से जोड़ा था। उन्होंने कहा कि भवन निर्माण हो या अन्य काम, मजदूरों के बिना यह संभव नहीं है। जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष चंद्रेश हिरवानी ने बताया कि भूपेश बघेल सरकार में मजदूर दिवस पर नेता, अधिकारी, कलेक्टर और एसपी सभी को बासी खिलाया जाता था। इससे मजदूरों को अपनत्व का एहसास होता था। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने इस आयोजन को बंद कर दिया है, लेकिन कांग्रेस इसे जारी रखे हुए है। 2020 में शुरू हुआ था बोरे बासी का आयोजन ‘बोरे-बासी दिवस’ की शुरुआत 2020 में हुई। भूपेश बघेल सरकार ने इसे व्यापक स्तर पर मनाया। यह एक सोशल मीडिया अभियान था, जिसने बोरे-बासी को छत्तीसगढ़ की पहचान से जोड़ दिया। इसे मजदूरों के भोजन के प्रतीक के रूप में स्थापित किया गया। क्या है बोरे-बासी की खासियत? पूर्व विधायक डोमेंद्र भेड़िया ने बताया कि बोरे-बासी न सिर्फ स्वादिष्ट, बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद है। यह गर्मियों में डिहाइड्रेशन और लू से बचाता है, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है और पाचन को बेहतर बनाता है। छत्तीसगढ़ के मजदूर और किसान इसे सुबह या दोपहर के भोजन के रूप में खाते हैं, जो उन्हें दिनभर की मेहनत के लिए ऊर्जा देता है। आज यह व्यंजन छत्तीसगढ़ के बड़े होटलों के मेन्यू में भी शामिल हो चुका है। इस कार्यक्रम में वर्षिष्ठ नेता रामजी भाई पटेल, श्याम जायसवाल, पद्मिनी साहू,विनोद शर्मा, अनिल यादव, साजन पटेल, वैभव साहू, रत्ती राम कोसमा सहित अन्य मौजूद रहे।


