भास्कर एक्सपर्ट राजधानी रांची में पंडरा स्थित बाल आश्रय गृह में सामान्य बच्चों के साथ ही मानसिक रूप से अस्वस्थ बच्चों को भी रखा जा रहा है। बीते दो वर्षों में अलग-अलग स्थानों से मानसिक रूप से अस्वस्थ चार बच्चों को रेस्क्यू कर बाल आश्रय गृह भेजा गया था। देखभाल और उपचार की कमी के कारण इनमें से एक बच्चा गंभीर रूप से बीमार पड़ गया। दो नवंबर को उसे रिम्स में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान 17 नवंबर को उसकी मौत हो गई। इस घटना ने बाल आश्रय गृह की क्षमता और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बाल आश्रय गृह में 18 वर्ष से कम उम्र के भूले-भटके बच्चों को रखा जाता है। लेकिन यहां मानसिक रूप से बीमार बच्चों को रखने की कोई विशेष सुविधा उपलब्ध नहीं है। आश्रय गृह में फिलहाल 27 बच्चे हैं। जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के अनुसार, मानसिक रूप से अस्वस्थ बच्चों को विशेष सुरक्षित स्थान पर साइकेट्रिस्ट की निगरानी में रखने का स्पष्ट प्रावधान है। लेकिन रांची में ऐसी व्यवस्था न होने के कारण इसका सीधा उल्लंघन हो रहा है। अस्वस्थ बच्चों के साथ अन्य बच्चों को रखना दोनों के अधिकारों का उल्लंघन स्पेशल बच्चों को रखने की व्यवस्था पर डालसा ने ये सिफारिशें भी कीं… {रांची में गंभीर मानसिक चुनौतियों वाले बच्चों के लिए विशेष चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशन बनाएं। {रिनपास द्वारा प्रस्तावित 100 बेड की सुविधा स्पेशल बच्चों के लिए तैयार करने को शीघ्र स्वीकृति देते हुए इसे शुरू किया जाए। {इमरजेंसी आवास हेतु रिनपास में एक ‘नोटिफाइड वार्ड’ का निर्माण हो, जहां प्रशिक्षित स्टाफ हों। {सभी चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशन को स्पष्ट निर्देश दिया जाए कि वे मानसिक रूप से बीमार बच्चों को सामान्य बच्चों के साथ न रखें। बच्चे की मौत के मामले में डालसा ने हाईकोर्ट को ये खामियां बताईं {बाल आश्रय गृह पंडरा, रांची के अधीक्षक ने कई बार सूचना दी है कि यहां मानसिक अस्वस्थ बच्चों को रखना सेफ नहीं है। {जिला विधिक सेवा प्राधिकार के कहने पर अस्थायी तौर पर ऐसे बच्चों को रखा जा रहा है। {मानिसक अस्वस्थ बच्चों को साथ रखने से सामान्य बच्चों पर गंभीर असर हो सकता है। {यहां ऐसे बच्चों को रखने के लिए प्रोटेक्टिव वार्ड, प्रशिक्षित स्टाफ, मनोवैज्ञानिक सपोर्ट की सुविधाएं नहीं हैं। मानसिक रूप से बीमार बच्चे को भेज दिया बाल आश्रय गृह बाल आश्रय गृह, पंडरा के अधीक्षक अमित कुमार ने बताया कि पिछले 17 अक्टूबर को रिनपास से बच्चे को आश्रय गृह भेज दिया गया। जबकि मानसिक व शारीरिक स्थिति ठीक नहीं लग रही थी। उसने दो-तीन बच्चों को दांत काट कर घायल कर दिया था। बिना कपड़े के बाहर निकल जाता था, इस वजह से उसे बांध कर रखने की मजबूरी थी। बीते 2 नवंबर को अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी, उसे रिम्स में भर्ती कराया गया। जहां इलाज के दौरान 15 दिन बाद उसकी मौत हो गई। उसे मिर्गी की शिकायत थी, जिसकी जानकारी हमें नहीं थी। इससे पहले मई 2024 में भी एक बच्चे की मौत हो चुकी है। अधीक्षक ने बताया कि उन्होंने कई बार ऐसे बच्चों को स्थानांतरित करने के लिए बरही स्थित स्पेशल सेंटर से संपर्क किया, लेकिन हर बार कहा गया कि यहां जगह उपलब्ध नहीं है। झारखंड में सिर्फ हजारीबाग में है स्पेशल चाइल्ड शेल्टर झारखंड में मानसिक रूप से अस्वस्थ बच्चों के लिए एक मात्र संस्था हजारीबाग के बरही में है। रांची में भी ऐसे बच्चों के लिए कोई सुरक्षित केंद्र नहीं है। जिन्हें विशेषज्ञ देखभाल, दवा, थेरेपी और प्रशिक्षित स्टाफ की जरूरत है, उन्हें ऐसी जगह रखा जा रहा है जहां संसाधनों और विशेषज्ञता दोनों की भारी कमी है। आश्रय गृह के अधीक्षक बोले अजीत कुमार, पूर्व महाधिवक्ता


