जिले को बाल विवाह की कुप्रथा से पूरी तरह मुक्त करने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने एक निर्णायक पहल शुरू की है। “बाल विवाह मुक्त भारत” अभियान के तहत प्राधिकरण और महिला अधिकारिता विभाग के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य विवाह आयोजनों से जुड़े विभिन्न सेवा प्रदाताओं को इस सामाजिक बुराई के खिलाफ जागरूक करना और उन्हें इस मुहिम का हिस्सा बनाना था। संगोष्ठी के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव महेंद्र कुमार सिंह सौलंकी ने टेंट यूनियन, डीजे संचालक, बैंड वादक, हलवाई और वेडिंग इवेंट कंपनियों के संचालकों के साथ सीधा संवाद किया। सचिव ने स्पष्ट किया कि बाल विवाह रोकने में इन सेवा प्रदाताओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। यदि वे बाल विवाह के आयोजनों में अपनी सेवाएं देने से इनकार कर दें, तो इस कुप्रथा पर प्रभावी लगाम लगाई जा सकती है। प्राधिकरण के सचिव एवं अतिरिक्त जिला न्यायाधीश महेंद्र कुमार सिंह सौलंकी ने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि इस बार झुंझुनूं जिले में एक भी बाल विवाह न हो। इसके लिए केवल कानून काफी नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग, विशेषकर विवाह आयोजनों से जुड़े व्यवसायियों को जिम्मेदारी लेनी होगी। गोपनीयता और सम्मान का वादा प्राधिकरण ने आमजन और व्यवसायियों से अपील की है कि यदि उनके मोहल्ले, कॉलोनी या गांव में कहीं भी बाल विवाह की सूचना मिलती है, तो वे तुरंत हेल्पलाइन नंबरों पर सूचना दी जा सकती है। चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 कानूनी सहायता हेल्पलाइन 15100 सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। सूचना देने वालों से किसी भी प्रकार की अनावश्यक पूछताछ नहीं की जाएगी। सजग नागरिक के रूप में सूचना देने वालों को विशेष दिवसों पर सम्मानित भी किया जाएगा। सामुदायिक शपथ और संकल्प कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी टेंटकर्मियों, डीजे संचालकों और अन्य व्यवसायियों को बाल विवाह न कराने और इसकी सूचना प्रशासन को देने की शपथ दिलाई गई। सभी ने एक स्वर में जिला प्रशासन की इस मुहिम का समर्थन करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर महिला एवं बाल अधिकारिता विभाग के अधिकारी और प्राधिकरण के कर्मचारी मौजूद रहे, जिन्होंने बाल विवाह के कानूनी परिणामों और बच्चों के भविष्य पर इसके दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।


