नीमच जनपद पंचायत ने बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त करने के लिए 100 दिवसीय जनजागरूकता अभियान तेज कर दिया है। इसी को लेकर गुरुवार को जनपद पंचायत नीमच के सभाकक्ष में सचिवों और ग्राम रोजगार सहायकों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) आरिफ खान ने स्पष्ट निर्देश दिए कि बाल विवाह कानूनन दंडनीय अपराध है और इसे रोकने में पंचायत स्तर के कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर होने वाले हर विवाह का अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराया जाए। नवविवाहित जोड़े का समग्र पोर्टल पर दर्ज होना आवश्यक सीईओ ने यह भी बताया कि शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए नवविवाहित जोड़े का समग्र पोर्टल पर दर्ज होना आवश्यक है, जिसके लिए वधू की आयु 18 वर्ष से अधिक होना अनिवार्य है। प्रशिक्षण सत्र में परियोजना अधिकारी महिला एवं बाल विकास, इरफ़ान अंसारी ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने अधिनियम की विभिन्न धाराओं के प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए समझाया कि यदि कोई लड़का बाल विवाह करता है, तो यह कानूनी अपराध है। बाल विवाह करवाने पर 1 लाख रुपए तक जुर्माना अंसारी ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति, अभिभावक या संरक्षक बाल विवाह को प्रोत्साहित करता है, आयोजित करता है या उसकी अनुमति देता है, तो उनके विरुद्ध सख्त दंड का प्रावधान है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे अपराधों के लिए अधिकतम 02 वर्ष का कारावास या ₹01 लाख तक का जुर्माना, अथवा दोनों हो सकते हैं। केटरिंग और हलवाई भी माने जाएंगे अपराधी अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि विवाह आयोजक, पुजारी, बैंड, टेंट, केटरिंग, हलवाई, परिवहन प्रदाता या विवाह से जुड़े अन्य सेवा प्रदाता भी यदि बाल विवाह के आयोजन में सहयोग करते हैं, तो उन्हें भी कानूनी अपराधी माना जाएगा और उन पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान सहायक यंत्री राजेश आर्य, आवास नोडल अविनाश भंडारी, पंचायत निरीक्षक आरएल मालवीय, सुपरवाइजर पिंकी भाटिया एवं सारिका केदार, स्वच्छ भारत मिशन के ब्लॉक समन्वयक प्रवीण नाथ, मनरेगा APO ऋतुराज बाथम, सहायक विकास विस्तार अधिकारी, पंचायत समन्वयक अधिकारी, सचिव एवं सहायक सचिव बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।


