भास्कर न्यूज |लुधियाना सीआईसीयू और एटीआईयू, यूनाइटेड साइकिल एंड पार्ट्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन की ओर से पावरकॉम रेगुलेटरी कमीशन (पंजाब राज्य विद्युत नियामक आयोग) द्वारा आयोजित पब्लिक हियरिंग में बिजली टैरिफ में की गई वृद्धि का विरोध किया है। इस दौरान संगठनों की ओर से पावरकॉम रेगुलेटरी कमीशन के चेयरमैन विश्वजीत खन्ना को मांगपत्र भी सौंपा गया। इस मीटिंग में परमजीत सिंह, करनैल सिंह, जेके वैद व अन्य शामिल थे। सीआईसीयू के अध्यक्ष उपकार सिंह आहूजा ने कहा कि पीएसपीसीएल और पीएसटीसीएल की वर्ष 2025-26 के लिए अतिरिक्त राजस्व और बिजली दरों में वृद्धि को दृढ़ता से खारिज कर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि बिजली चोरी के कारण प्रति वर्ष लगभग 2600 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है, जिसे पीएसपीसीएल/पीएसटीसीए ल द्वारा तुरंत नियंत्रित किया जाना चाहिए। दिशा-निर्देशों के अनुसार ट्रांसमिशन और वितरण घाटे को 18% से घटाकर 8% किया जाना चाहिए। यूनाइटेड साइकिल पार्ट्स एसोसिएशन के प्रधान हरसिमर जीत सिंह लक्की ने 5 रुपये प्रति यूनिट की दर पर बिजली की आपूर्ति की मांग की है, जिसमें सभी कर शामिल हों, जैसा कि सरकार ने पहले वादा किया था। औद्योगिक आपूर्ति के लिए बिजली श्रेणियों को संशोधित करने की आवश्यकता बताई गई है, जैसे छोटी आपूर्ति सीमा को 49 केवीए और मध्यम आपूर्ति सीमा को 149 केवीए करना। उन्होंने यह सुझाव दिया है कि निश्चित शुल्क केवल उन औद्योगिक इकाइयों पर लागू होना चाहिए जो निष्क्रिय हैं और जो सक्रिय रूप से बिजली का उपयोग कर रही हैं उन्हें इससे छूट दी जानी चाहिए। पीएसपीसीएल द्वारा छोटे और मझोले उद्योगों पर बिजली के अनधिकृत उपयोग के लिए जुर्माना लगाए जाने का विरोध किया गया है, जबकि इन उद्योगों ने सही तरीके से बिजली का उपयोग किया है और भुगतान किया है। स्मार्ट मीटरों के लागू होने से बिजली की लागत में वृद्धि होने का विरोध किया गया है। इन संगठनों का कहना है कि मीटरों की कीमतें बहुत अधिक हैं और विभाग को इन्हें उद्योगों से वसूलने की बजाय खुद खरीद कर स्थापित करना चाहिए। गुणवत्ता मीटर के लिए आवेदन न करने पर उद्योगों के खिलाफ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाया गया है। साथ ही, उद्योगपतियों को बिना दंड के गुणवत्ता मीटर के लिए आवेदन करने का अवसर देने की मांग की गई है। पीएसईआरसी बैठक में पंकज शर्मा ने पीएसईआरसी से स्मार्ट मीटर और टैरिफ वृद्धि पर सख्त रुख अपनाने की मांग की, सरकारी विभागों के बकाए का मुद्दा भी उठाया।


