बिना साक्ष्य क्लेम खारिज करना सेवा में कमी:उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को 1.86 लाख भुगतान का आदेश दिया

ग्वालियर में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी को उपभोक्ता का स्वास्थ्य बीमा दावा बिना ठोस साक्ष्य के खारिज करने को ‘सेवा में कमी’ माना है। आयोग ने कंपनी को स्वीकृत बीमा राशि, ब्याज और मानसिक क्षतिपूर्ति का भुगतान करने का निर्देश दिया है। यह मामला ग्वालियर निवासी पूजा शर्मा से संबंधित है, जिन्होंने रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी से स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी। सितंबर 2024 में तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था। इलाज के दौरान उन्होंने कैशलेस सुविधा के लिए बीमा कंपनी से अनुरोध किया, लेकिन अतिरिक्त दस्तावेज मांगने के बावजूद कंपनी ने उनका कैशलेस क्लेम स्वीकृत नहीं किया। इलाज के बाद पूजा शर्मा ने 1 लाख 98 हजार 809 रुपए के बीमा दावे का आवेदन किया। बीमा कंपनी ने इस दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि पॉलिसी लेते समय पूजा शर्मा ने मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मोटापे जैसी पूर्व-मौजूदा बीमारियों की जानकारी छिपाई थी। आयोग ने सुनवाई के दौरान पाया कि बीमा कंपनी यह साबित करने में विफल रही कि पॉलिसी लेने से पहले उपभोक्ता इन बीमारियों से पीड़ित थीं और उन्हें इसकी जानकारी थी। आयोग ने स्पष्ट किया कि केवल अनुमान या सामान्य आरोपों के आधार पर बीमा दावे को निरस्त करना उचित नहीं है। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि बीमा कंपनी ने पर्याप्त प्रमाण के बिना उपभोक्ता का वैध दावा खारिज कर ‘सेवा में कमी’ की है। शिकायत स्वीकार करते हुए आयोग ने कंपनी को 1 लाख 86 हजार 548 रुपए की बीमा राशि 45 दिनों के भीतर अदा करने का निर्देश दिया। यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होता है, तो इस राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। इसके अतिरिक्त, कंपनी को मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में 1500 रुपए और वाद व्यय के रूप में 1000 रुपए का भुगतान करने का भी आदेश दिया गया है।

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