एक शव, जिसके न सिर और न पैर। सिर्फ धड़-धड़। दूसरे शव के नाम पर सिर्फ हडि्डयां। वो भी कट्टे में बांधकर लाई हुई। तीसरे में मांस के लोथड़े। जयपुर-अजमेर मार्ग पर हुए हादसे के बाद ये दिल दहलाने देने वाले दृश्य जयपुर के लोगों ने शुक्रवार को देखे। कहते हैं- किसी के दर्द को बयां नहीं किया जा सकता। पीड़ा काे महसूस नहीं किया जा सकता। और दुख: काे तो समझा ही नहीं जा सकता। एक से दिखने वाले इन शब्दों का मर्म क्या होता है? ये कोई जयपुर के लोगों से पूछे? हर दिल में पहाड़ जैसी पीड़ा थी। दर्द ऐसा था कि डॉक्टरों के दिल पसीज गए। मदद में उठे हाथ कांप गए। ऐसा कोई नहीं था, जो इस हादसे को सुनकर सहज था। शुक्रवार सुबह करीब 5:50 बजे रिपोर्टर राकेश गुसाई के फोन से आंख खुली। बताया- जयपुर-अजमेर मार्ग पर बड़ा हादसा हो गया है। कई लोगों की मौत की खबर है। रास्ता बंद है। मैं जैसे-तैसे पहुंच रहा हूं। आवाज में रूआंसापन था? मैंने पूछा कुछ बड़ा? बोला- 15-20 लोगों की मौत की खबर है। पत्रकारिता का धर्म है कि सबसे पहले, सबसे सटीक और सबसे डिटेल खबर पाठकों तक पहुंचाना। खबर बननी शुरू हो चुकी थी। लेकिन जैसे-जैसे रिपोर्टर जानकारी देने लगा मानो एक-एक पल भारी पड़ने लगा। ऐसे लगने लगा कि काश, आज का सूर्यास्त देरी से होता। हर एक सूचना सिहरा देने वाली थी। आमतौर पर हम न्यूज के लोग रोज हादसों की खबरों से गुजरते हैं, लेकिन ये घटना असामान्य थी। ज्यों-ज्यों कंटेंट आने लगा डेस्क और वीडियो टीम के माथे पर दुख की सलवटें उभरने लगी। ऐसा लग रहा था कि अब ये रोया, अब ये रोया। एक टीम अस्पताल में पहुंच गई थी। वहां की आंखों देखी को सुनना सहज नहीं था। जयपुरिया अस्पताल से रिपोर्टर दिनेश पालीवाल ने बताया- बिना सिर की लाश हॉस्पिटल पहुंची है। मैं स्तब्ध? पूछा- तुमने देखा? बोला, हिम्मत नहीं है। जयपुरिया हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉक्टर महेश मंगल को कोट करते हुए बताया कि यहां जो बॉडी आई है, उसका सिर गायब है। पैरों के पंजे भी नहीं हैं। पहचान करना मुश्किल हो गया है। हादसा स्थल से रिपोर्टर ने बताया कि बस के पास खड़ा हूं। एक दरवाजा तो पूरी तरह बंद है। ऐसा लग रहा है कि कई लोगों को तो निकलने का मौका नहीं मिला होगा। जिंदा ही जल गए। कुछ शेष नहीं बचा। राधेश्याम की जिंदगी से बचने के जतन की कहानी बताते तो कई बार रिपोर्टर चुप हो गया। बताया राधेश्याम झुलसने के बावजूद दौड़कर 800 मीटर दूर पहुंचे। जान बचाने की बहुत कोशिश की। कपड़े खुद उतारे। आग में इतना झुलसने के बाद भी परिजनों को फोन किया। फिर भी जिंदगी से हार गए। आरएसी कॉन्स्टेबल अनिता की पहचान उनके भाई ने पैर में लगी नेल पॉलिश और बिछिया से की। नई बाइक पर जा रहे रमेश का हेलमेट चेहरे से चिपक गया। आंखें तक जल गई है। होंठ भी जल गए। दर्द की ऐसी कई अंतहीन कहानियां हैं। जो दिन भर चली। लेकिन सवाल है कि सरकारों के पास इन असहनीय दर्द को मापने की कोई इकाई है क्या? बड़ा सवाल ये ही है कि आखिर इतने बड़े हादसे क्यों होते हैं? सरकारें संवेदनशील होने के दावे करती हैं, घटना के बाद तत्परता के साथ मुख्यमंत्री और चिकित्सा मंत्री अस्पताल और घटनास्थल पर पहुंचे। व्यवस्थाएं देखीं। लेकिन आखिर नेशनल हाईवे पर बड़े-बड़े ट्रक यू-टर्न कैसे ले सकते हैं? पूरा प्रदेश जानता है ये हाईवे हादसों का है। हर दिन जाम के जंजाल में आम आदमी फंसा रहता है? हर दिन कोई न कोई जान गंवाता है। ये चौराहा खतरनाक है। क्या सरकारें और प्रशासन सिर्फ ब्लैक स्पॉट बताकर अपनी जिम्मेदारियों से बच सकते हैं। अगर सरकारें और जनप्रतिनिधि संवेदनशील हैं तो अपने एक्शन से इसे साबित भी करें। क्योंकि सबसे आसान ये कहना है कि हादसे को तो कोई कैसे रोकें? लेकिन कोई सरकार ऐसा प्रण कर लें कि वो ब्लैक स्पॉट कम नहीं खत्म करेगी तो दर्द और चीत्कार से मुक्ति तो मिलेगी ही दुआएं भी मिलेगी। राजस्थान ऐसे हादसे नहीं देखना चाहता। सबसे बड़ा सवाल : कब खत्म होंगे लापरवाही के यू-टर्न
हादसे की सबसे बड़ी वजह जो निकलकर सामने आई है वो है लापरवाही के यू-टर्न। लंबे समय से ये समस्या बनी हुई है। तीन साल के इंतजार के बाद रिंग रोड तो शुरू कर दी गई, लेकिन पांच साल बाद भी क्लोअर लीफ नहीं बनाए गए। इसी खामी की वजह से LPG के टैंकर ने यू-टर्न लिया और केमिकल से भरे ट्रक ने उसे टक्कर मार दी। सबसे बड़ा डर : बढ़ सकता है मौतों का आंकड़ा
हादसे में अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है। आशंका है ये आंकड़ा और भी बढ़ सकता है। क्योंकि 29 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें कई गंभीर रूप से झुलसे हुए हैं। इसके अलावा टैंकर से उठी आग ने आसपास की करीब 40 गाड़ियों को चपेट में ले लिया था। उन गाड़ियों में कितने लोग सवार थे? उनमें कितने गंभीर रूप से झुलसे? इन सवालों के जवाब भी सरकार और प्रशासन के पास नहीं हैं। तेजी से इन सवालों के जवाब तलाशने होंगे, वरना मौतों का ये आंकड़ा और भी बढ़ सकता है। ……………………… जयपुर हादसे से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… जयपुर में LPG टैंकर में ब्लास्ट, 11 जिंदा जले:ट्रक की टक्कर से आग लगी, 200 फीट ऊंची लपटें उठीं; बचने का मौका नहीं मिला जयपुर में शुक्रवार सुबह अजमेर हाईवे पर दिल्ली पब्लिक स्कूल के सामने एलपीजी गैस से भरे टैंकर में धमाका हो गया। हादसे में 11 लोग जिंदा जल गए और 33 लोग झुलस गए हैं। गैस टैंकर को एक ट्रक ने टक्कर मारी थी। इससे टैंकर से गैस का रिसाव हुआ, जो 200 मीटर तक फैल गई, जिसने अचानक आग पकड़ ली। (पूरी खबर पढ़ें) जयपुर टैंकर ब्लास्ट से दोगुनी तबाही मच सकती थी:सिर्फ 100 मीटर दूर था 18 टन LPG से भरा टैंकर और माचिस का ट्रक ‘अचानक से तेज धमाका हुआ, 35-40 गाड़ियां भभकने लगीं, लोग आंखों के सामने जिंदा जल रहे थे। आग की चपेट में आई बस और एक कार में लोग मदद के लिए चीख-पुकार रहे थे। मैंने मेरे जीवन में इतना बड़ा हादसा नहीं देखा।’ (पूरी खबर पढ़ें) जयपुर टैंकर ब्लास्ट इतना भयावह कि उड़ते पक्षी जल गए:34 लोगों से भरी बस जली, 11 जिंदा जले; बाइक सवार का हेलमेट चेहरे से चिपका जयपुर में हुए LPG टैंकर ब्लास्ट में 34 पैसेंजर्स से भरी स्लीपर बस भी जल गई है। इसमें सवार 34 पैसेंजर्स में से 20 झुलसे हैं। वहीं, 14 पैसेंजर्स और ड्राइवर-कंडक्टर लापता हैं। टैंकर फटने के बाद लगी आग की लपटें इतनी ऊंची थीं कि कई पक्षी तक जल गए। (पूरी खबर पढ़ें) VIDEO में देखें जयपुर टैंकर ब्लास्ट हादसा:अजमेर हाईवे पर 1 किलोमीटर तक आग; कपड़े उतारकर लोगों ने बचाई जान जयपुर में शुक्रवार सुबह अब तक का सबसे भीषण सड़क हादसा हुआ। एलपीजी से भरे टैंकर से उठी आग एक किलोमीटर तक दिखाई दी। हादसे का एरियल व्यू देखने से ऐसा लग रहा था कि युद्ध के मैदान से आग के गोले निकल रहे हों। हादसा इतना भयावह था कि आग की चपेट में आए लोगों के अंडर गारमेंट्स तक जल गए। (पूरी खबर पढ़ें) बिना परमिट दौड़ रही थी टैंकर ब्लास्ट की शिकार बस:34 में 20 यात्री झुलसे, 14 लापता; एक परमिट 14 महीने, दूसरा 4 महीने पहले एक्सपायर जयपुर में हुए LPG टैंकर ब्लास्ट में 34 पैसेंजर्स से भरी स्लीपर बस भी जल गई है। इसमें सवार 34 पैसेंजर्स में से 20 झुलसे हैं। वहीं, 14 पैसेंजर्स और ड्राइवर-कंडक्टर लापता हैं। चौंकाने वाली बात ये है कि LPG टैंकर ब्लास्ट की चपेट में आई इस बस के पास रोड पर चलने का परमिट भी नहीं था। (पूरी खबर पढ़ें) जयपुर में LPG टैंकर ब्लास्ट का एनिमेशन VIDEO: आग से झुलसे लोग सड़क पर भागते दिखे, सड़कों और घरों में फैलती गई लपटें जयपुर में शुक्रवार सुबह एलपीजी टैंकर में ब्लास्ट के बाद अजमेर हाईवे पर दहशत मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए भागते हुए नजर आए। हादसे में 11 लोग जिंदा जल गए। 33 लोग झुलस गए। इस दौरान भयावह मंजर दिखा। आग से झुलसे लोग सड़क पर भागते हुए दिखे। (पूरी खबर पढ़ें)


