बिलासपुर में कैल्शियम और आयरन से भरपूर मुनगा की डिमांड बढ़ गई है। यहां से रोजाना कोलकाता, आसनसोल और बिहार के लिए बड़ी मात्रा में मुनगा भेजा जा रहा है। वहीं इस पर गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी में महत्वपूर्ण शोध भी किया जा रहा है। वनस्पति विभाग के प्रोफेसर एसके शाही ने बताया कि विश्वविद्यालय में मुनगा से कैंसर और एंटी-फंगल दवाएं बनाने का प्रयास किया जा रहा है। बुधवारी बाजार के व्यापारी संतोष सोनकर ने बताया कि साउथ बिहार, कुर्ला और बिलासपुर-टाटानगर एक्सप्रेस से रोजाना 25-30 क्विंटल मुनगा का निर्यात हो रहा है। मुनगा का वैज्ञानिक नाम ओलिथेरा प्रोफेसर शाही के मुताबिक, मुनगा या सहजन का वैज्ञानिक नाम ओलिथेरा है। विश्वविद्यालय में इस पर नैनो फर्टिलाइजर और नैनो पार्टिकल का अध्ययन किया जा रहा है। मुनगा को सुपर फूड माना जाता है। यह विटामिन ए, सी, कैल्शियम और आयरन से भरपूर होता है। बाजार में इसका पाउडर, टैबलेट और कैप्सूल भी उपलब्ध हैं। 50 रुपए किलो है मुनगा का दाम व्यावसायिक दृष्टि से मुनगा काफी लाभदायक है। व्यापारी बताते है कि बाजार में 4-5 स्टिक का बंडल 20 रुपए में बिकता है। प्रति किलो दाम 50-55 रुपए है। छत्तीसगढ़ में लगभग हर घर की बाड़ी में मुनगा का पेड़ मिल जाता है। अब नदी किनारे इसकी व्यावसायिक खेती भी शुरू हो गई है। दिसंबर से मार्च तक रहता है सीजन मुनगा का मौसम दिसंबर से मार्च तक रहता है। दक्षिण भारत में इसका उपयोग सांभर में किया जाता है। बिहार और झारखंड में इसे सब्जी के रूप में खाया जाता है। मुनगा की पत्तियों का उपयोग जैविक खाद के रूप में भी होता है। यह रक्त की कमी दूर करने और शुगर नियंत्रित करने में भी सहायक है। जानिए कितना फायदेमंद है मुनगा एक्सपर्ट के मुताबिक, कम खून वाले मरीजों के लिए मुनगा पत्ती की भाजी काफी फायदेमंद होती है। मुनगा के फूलों की सब्जी भी बनाई जाती है। बच्चा होने के बाद प्रसूता को मुनगा की सब्जी खिलाने से शरीर में स्फूर्ति आती है। इससे मां के दूध में पौष्टिकता आती है। साथ ही बच्चे के सेहत के लिए भी ये फायदेमंद होता है।


