बिलासपुर में अंधड़ से 24 घंटे से बिजली गुल:982 पंप बंद, हजारों घर प्यासे; आक्रोशित लोगों ने विधायक आवास का किया घेराव

बिलासपुर में शनिवार रात आए तेज अंधड़-तूफान ने शहर की बिजली व्यवस्था को पूरी तरह से ठप कर दिया। शहर से लेकर गांव तक अंधेरा छा गया। बिजली की बहाली के लिए घंटों इंतजार करने के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। नाराज लोगों ने देर रात विधायक अमर अग्रवाल के राजेंद्र नगर स्थित बंगले का घेराव किया। लोगों ने इस दौरान वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जनता जाग रही है और विधायक सो रहे हैं। विधायक इस दौरान बंगले से बाहर नहीं निकले। बिजली ठप होने से 982 पावर पंप बंद हो गए। इससे हजारों घरों में पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई। तालापारा, मगरपारा, चिंगराजपारा, खमतराई, बहतराई, राजकिशोर नगर और सरकंडा जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में पेयजल संकट गहरा गया। दैनिक भास्कर ने इस मामले में नगर विधायक, नगर निगम और बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क का प्रयास किया। हालांकि, किसी ने भी फोन नहीं उठाया। दूसरे दिन भी बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हो पाया है। पूर्व विधायक ने भाजपाइयों पर कसा तंज पूर्व विधायक शैलेश पांडे ने तंज कसते कहा कि भाजपा के जनप्रतिनिधि सो रहे हैं, जनता ने जिन्हें जिताया उन्हें शहर की जनता से कोई सरोकार नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व मंत्री लोगों को राहत दिलाने के बजाय घर में सो रहे हैं। भाजपा विधायकों के घर में बिजली है, लेकिन आम जनता के घर में अंधेरा है। पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि केंद्रीय राज्य मंत्री और डिप्टी सीएम को भी बिजली कटौती और पानी की समस्या से जूझ रहे लोगों की चिंता नहीं है। बिलासपुर शहर एवं जिले के लोग अंधेरे में जूझ रहे हैं। उन्होंने टिपप्णी की कि सरप्लस बिजली का दावा करने वाली डबल इंजन की सरकार में पानी गिरने के पहले ही दिन भर के लिए बिजली बंद कर दी जाती है। पांडेय ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन के अधिकारी भी रात को सड़कों पर नहीं दिखे। दो दिनों से लगातार बिजली कटौती से कई वार्डों में पानी नहीं आ रहा है। वहीं, कई जगह बोरिंग फेल है, बिजली के तार टूट गए हैं। आज भी आधे शहर में अंधेरा है। विधायक के घेराव की चेतावनी
उन्होंने चेतावनी दी कि बिलासपुर में यदि बिजली कटौती होती रही तो जनता शहर विधायक का घेराव करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली दफ्तर के अधिकारी गायब रहे, वहीं कर्मचारी नहीं हैं, जिसके कारण टूटे हुए तार और क्षतिग्रस्त खंभों का सुधार नहीं हो पा रहा है।

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