बिलासपुर में BJP की मेयर प्रत्याशी को हाईकोर्ट का नोटिस:एल पद्मजा की OBC जाति प्रमाण चुनौती, HC ने शासन और चुनाव आयोग से मांगा जवाब से मांगा जवाब

बिलासपुर में भाजपा की मेयर पद की प्रत्याशी की जाति का विवाद को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई शुरू कर दी है। जस्टिस बीडी गुरु की बेंच ने मामले में राज्य शासन, चुनाव आयोग के साथ ही एल पद्मजा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही मामले की सुनवाई तीन सप्ताह बाद तय की है। बता दें कि इससे पहले याचिकाकर्ता BSP उम्मीदवार ने संशोधित याचिका पेश करने के लिए याचिका वापस ले लिया था। नगर निगम चुनाव में भाजपा की महापौर प्रत्याशी पूजा विधानी के ओबीसी जाति प्रमाण पत्र काविवाद अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी आकाश मौर्य ने इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। उन्होंने अपने एडवोकेट के जरिए याचिका पर हाईकोर्ट में अर्जेंट हियरिंग का आवेदन देकर तत्काल सुनवाई की मांग भी की है। याचिका में पूजा विधानी के जाति प्रमाण पत्र को लेकर आपत्ति जताई गई है और नामांकन रद्द करने के साथ ही उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है। BSP उम्मीदवार ने दोबारा लगाई याचिका इससे पहले भी BSP उम्मीदवार आकाश मौर्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसमें लिपिकीय त्रुटि के चलते याचिकाकर्ता को जरुरी संशोधन के लिए अपनी याचिका वापस लेनी पड़ी थी। कोर्ट ने इसे स्वीकार कर याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी थी। दरअसल, पहले याचिकाकर्ता ने याचिका में निर्वाचन आयोग को प्रमुख पक्षकार नहीं बनाया था। रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका पर सवाल याचिकाकर्ता आकाश मौर्य ने आरोप लगाया है कि नामांकन पत्रों की जांच से पहले उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से भाजपा प्रत्याशी द्वारा प्रस्तुत ओबीसी जाति प्रमाण पत्र के दस्तावेजों की मांग की थी, लेकिन निर्वाचन अधिकारी (RO) ने उन्हें यह दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए। उनका कहना है कि निर्वाचन अधिकारी का यह रवैया संदेहास्पद है और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। कांग्रेस प्रत्याशी ने भी OBC जाति प्रमाण पत्र पर जताई आपत्ति कांग्रेस का आरोप है कि विधानी का ओबीसी का जाति प्रमाण पत्र उचित नहीं है। आरोप लगाया गया कि उनके पिता अनारक्षित वर्ग से थे, जबकि उनका प्रमाण पत्र ओबीसी का बनाया गया है। कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस लेकर जाति प्रमाणपत्र को गलत बताया था। स्क्रूटनी के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर ने कांग्रेस प्रत्याशी को जाति प्रमाण पत्र देने से इनकार कर दिया था। बाद में विधानी के जाति प्रमाण पत्र को सही बताते हुए उनका नामांकन फॉर्म मंजूर कर लिया गया।

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