बीआरएस नगर में वाहनों को टो करने से बुजुर्ग व महिलाएं हो रहीं परेशान, लोगों का आरोप- बिना किसी कारण के टो कर ले जाते…

लुधियाना| बीआरएस नगर इलाके के लोग इन दिनों प्राइवेट टो सेवा और ट्रैफिक पुलिस की कार्रवाई से परेशान हैं। ट्रैफिक पुलिस ने एक प्राइवेट कंपनी को वाहनों को टो करने का ठेका दिया है, जिसके तहत टो किए गए प्रत्येक वाहन पर 500 रुपये की कमीशन और 600 रुपये का सरकारी पर्ची शुल्क लिया जाता है। इस प्रक्रिया से वाहन मालिकों के साथ-साथ श्रद्धालु भी असुविधा का सामना कर रहे हैं। गुरुद्वारा साहिब और मंदिरों में माथा टेकने आने वाले श्रद्धालु जब पूजा करके बाहर निकलते हैं, तो अकसर अपनी गाड़ी टो होते हुए पाते हैं। इसका खास असर बुजुर्गों और महिलाओं पर पड़ रहा है। बीआरएस नगर मार्केट के प्रधान गुलबहार सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि जब से प्राइवेट कंपनी को टो करने का ठेका दिया गया है, तब से गाड़ियों को बिना किसी कारण के टो कर लिया जाता है। उन्होंने कहा कि टो करने वालों के पास न तो वर्दी होती है और न ही वे सीट बेल्ट का पालन करते हैं। गुलबहार सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि इन निजी टो सेवा वालों को अगर कोई महिला अपनी गाड़ी छोड़ने के लिए कहती है, तो वे केवल कैश लेकर गाड़ी छोड़ देते हैं, जिससे यह प्रतीत होता है कि वे एक खास नीति के तहत काम कर रहे हैं। तरनप्रीत कौर ने बताया कि इस सरकार के तहत आम जनता को नुकसान हो रहा है। नगर निगम ने अवैध बिल्डिंगें बना दी हैं, जिससे सड़क पर जाम की समस्या बनी रहती है, जबकि दूसरी तरफ ट्रैफिक पुलिस वाहनों को उठाने का काम कर रही है। उन्होंने बताया कि कई बार लोगों को पैदल ही सराभा नगर थाने जाना पड़ता है, क्योंकि उनके पास पैसे नहीं होते। पिक एंड चूज नीति पर सवाल: तरनप्रीत कौर ने यह भी आरोप लगाया कि प्राइवेट टो सेवा में पिक एंड चूज नीति अपनाई जा रही है। इसके तहत विधायक के खास समर्थकों को छोड़ दिया जाता है, जबकि आम जनता को परेशान किया जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें लगता है कि उनका शोषण किया जा रहा है और बिना किसी ठोस कारण के उनके वाहनों को टो कर लिया जाता है। एसीपी का कोई जवाब नहीं: जब इस मुद्दे पर ट्रैफिक एसीपी जतिन बंसल से संपर्क किया गया, तो उन्होंने फोन का जवाब नहीं दिया। इसके बाद उन्हें संदेश भेजा गया, लेकिन उन्होंने जनता के सवालों का जवाब देने की आवश्यकता नहीं समझी और कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

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