राज्य के बीएड कॉलेजों में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) द्वारा निर्धारित नियमों और दिशा-निर्देशों की अनदेखी हो रही है। इन कॉलेजों में सेवा दे रहे फैकल्टी और स्टाफ को निर्धारित वेतन भुगतान नहीं किया जाता है। इतना ही कॉलेज की वेबसाइट पर एनसीटीई की गाइडलाइन के अनुसार जानकारी नहीं दी जाती है। यह स्थिति न केवल इन कॉलेजों में शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगाती है, बल्कि शिक्षकों व स्टाफ कम मानदेय में कार्य करने का विवश हैं। रांची यूनिवर्सिटी प्रशासन को भी इन बीएड कॉलेजों के बारे में शिकायत मिली है। इसे गंभीरता से लेते हुए प्रभारी वीसी प्रो. (डॉ.) डीके सिंह ने कि दो सदस्यीय कमेटी गठित की है, जिसमें डीएसडब्ल्यू डॉ. सुदेश कुमार साहू और डिप्टी रजिस्ट्रार डॉ. प्रीतम कुमार शामिल हैं। गठित कमेटी आरयू के किसी भी बीएड कॉलेज में औचक निरीक्षण कर सकती है। कमेटी यह देखेगी कि एनसीटीई की नियमों की अनदेखी हो रही है या नहीं। निरीक्षण के बाद कमेटी द्वारा रिपोर्ट जमा की जाएगी, जिसके आधार पर यूनिवर्सिटी प्रशासन कार्रवाई करेगा। बताते चलें कि रांची यूनिवर्सिटी के अंतर्गत 29 बीएड कॉलेज हैं। इसमें 25 बीएड कॉलेज एफिलिएटेड हैं। राज्यपाल की अध्यक्षता में 28 जुलाई को राज्य के सभी विश्वविद्यालय के कुलपतियों की समीक्षा बैठक राजभवन में होनी है। इसके लिए राज भवन द्वारा सभी विश्वविद्यालय को एजेंडा भेज कर जवाब मांगा गया था। आरयू के अधिकारियों ने गुरुवार को दिनभर कुलसचिव डॉ. गुरु चरण साहू डिप्टी रजिस्ट्रार डॉ. प्रीतम कुमार, प्रॉक्टर डॉक्टर मुकुंद मेहता, कंप्यूटर सेंटर के डायरेक्टर डॉ. नैनी सक्सैना जवाब तैयार करने में व्यस्त दिखीं। दो दिनों में राजभवन को जवाब सौंप दिया जाएगा। वेबसाइट पर सूचनाओं का अभाव एनसीटीई के नियमों के तहत सभी मान्यता प्राप्त संस्थानों को अपनी वेबसाइट पर कॉलेज से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारी देनी है। इसमें फैकल्टी विवरण, शुल्क संरचना, उपलब्ध सुविधाएं, मान्यता स्थिति, प्रवेश प्रक्रिया आदि शामिल है। आरयू के अधिकांश बीएड कॉलेजों की वेबसाइट पर अधूरी जानकारी है। निर्धारित फैकल्टी व स्टाफ नहीं बीएड कॉलेजों में एनसीटीई गाइडलाइन के अनुसार निर्धारित फैकल्टी नहीं हैं। फैकल्टी नियुक्ति में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाता है। तय मानक के अनुसार स्टॉफ की कमी है। बीएड कॉलेज के शिक्षकों और कर्मचारियों को निर्धारित वेतन भी नहीं दिया जाता है।


