झालावाड़ जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने सोयाबीन बीज अंकुरित नहीं होने के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने राजस्थान स्टेट सीड्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड, झालावाड़ और राजस्थान राज्य बीज निगम लिमिटेड, जयपुर को किसानों को मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयोग के अध्यक्ष ईश्वरी लाल वर्मा और सदस्य वीरेंद्र सिंह रावत ने किसान रामरतन नागर और छीतरलाल खंगार के परिवाद स्वीकार किए। आदेश के अनुसार किसान रामरतन को 1 लाख रुपए और किसान छीतरलाल को 50 हजार रुपए क्षतिपूर्ति के रूप में दिए जाएंगे।
इसके अतिरिक्त, दोनों किसानों को मानसिक संताप के लिए 10-10 हजार रुपए और परिवाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपए भी अदा करने होंगे। यह कुल राशि निर्णय की तिथि से 45 दिनों के भीतर चुकानी होगी। परिवादी किसानों ने आयोग को बताया था कि उन्होंने खरीफ की फसल के लिए राजस्थान स्टेट सीड्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड, झालावाड़ से सोयाबीन का बीज खरीदा था। बुवाई के बाद बीज अंकुरित नहीं हुआ। खेतों की खुदाई करने पर बीज सड़ा हुआ पाया गया।
किसानों ने बीज निगम से शिकायत की थी, जिसके बाद निगम के अधिकारियों ने खेतों का निरीक्षण किया, लेकिन कोई मौका रिपोर्ट तैयार नहीं की गई और न ही किसानों को कोई क्षतिपूर्ति दी गई। सुनवाई के दौरान आयोग ने माना कि किसानों को खराब गुणवत्ता का बीज दिया गया था, जिससे उन्हें आर्थिक और मानसिक क्षति हुई। आयोग ने यह भी आदेश दिया कि क्षतिपूर्ति की राशि पर परिवाद प्रस्तुत करने की तिथि से वसूली की तिथि तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा। इस निर्णय को उपभोक्ता अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।


