चौक फव्वारा स्थित श्री मारवाड़ी पंचायती बड़ा मंदिर श्री रघुनाथ में रविवार को 7वें दिन की कथा की गई। वृंदावन से पधारे पंडित शुभम तिवारी ने भक्तों को कथा का विस्तार समझाया। उन्होंने कहा कि मां भगवती ने शुभ और निशुभ को मारा और वह दोनों पाताल में रहने वाले थे। सब असुरों के इष्टदेव ब्रह्मा जी हैं। क्योंकि वह सबको पैदा करते हैं और पैदा करने वाले का सब बच्चों पर साथ अपनापन रहता ही है। भगवान विष्णु पर पालने की जिम्मेदारी है। वह सात्विक जीवन जीने वालों को बहुत ज्यादा प्रोत्साहित करते हैं। ब्रह्मा जी क्योंकि पिता है जो भी चरणों में आकर रो पड़ा उसी को आशीर्वाद दे देते हैं। असुरों के ईष्टदेव ब्रह्मा जी हैं और दूसरे हैं भगवान शंकर। भगवान शंकर भी दाता है भोले बाबा हैं जो तप करने आया उसे ही आशीर्वाद दे डाला, लेकिन भगवान विष्णु, श्री कृष्ण और राम जी ऐसे आशीर्वाद नहीं देते। क्योंकि उनके ऊपर पालन की जिम्मेदारी है। ब्रह्मा जी केवल असुरों के लिए उपास्य है उनका केवल पुष्कर में ही मंदिर है। शुभ निशुभ वहां पहुंचे और माया बीज का जाप शुरू किया। महाराज ने कहा कि बीज मंत्रों का जप करने से शरीर में विशेष शक्ति आती है। इसलिए बीज मंत्रों का जप करते रहना चाहिए। मंत्र के साथ यदि बीज मंत्र लगा दिया जाए तब मंत्र शक्तिशाली हो जाता है। बीज मंत्र से मंत्र में चेतना आ जाती है। कथा के अंत में भक्तों ने मिलकर आरती की। इस मौके पर भावना, संगीता, दिनेश सिंगला, दिनेश सुनेजा, सुधीर शर्मा समेत कई भक्त मौजूद रहे।


