ठंड बढ़ने के साथ ही हाई ब्लड प्रेशर (बीपी) के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। बड़ी संख्या में ऐसे मरीज बेचैनी और उलझन जैसी समस्याओं के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। शाम ढलने के बाद रात में बीपी के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी देखी जा रही है। ज्यादातर ऐसे मरीज हैं, जिन्हें बीपी और शुगर जैसी समस्याएं हैं। वहीं, एक्सपर्ट कहते हैं कि कुछ मरीजों में ये समस्या दवा के सेवन में बरती जाने वाली लापरवाही की वजह से है। सिविल अस्पताल में आने लगे मरीज
लखनऊ के डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश श्रीवास्तव कहते हैं कि सर्दी लगने के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। शाम होने के बाद इन मरीजों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है। इनमें सांस के रोगियों के अलावा बीपी और हार्ट के मरीज शामिल है। ठंड में दवा का गैप न करें
लखनऊ के सबसे बड़े चिकित्सालय बलरामपुर अस्पताल में भी बीपी के मरीज बढ़े हैं। यहां के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय तेवतिया कहते हैं कि ठंड के दौरान इसकी चपेट में आने वाले मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। ऐसे मरीज के इलाज को लेकर इमरजेंसी में तैनात मेडिकल अफसर को भी निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि ठंड में देर रात ऐसे मेरीज सामने आते हैं, जिन्हें बेचैनी और अनिद्रा जैसे लक्षण हैं। इन मरीजों की जांच में बीपी हाई मिल रहा है। ऐसे में ब्लड प्रेशर के मरीजों को नियमित इसकी मॉनीटरिंग करने को कहा गया है। इन मरीजों को ठंड के दौरान दवा में गैप न करने की सलाह दी गई है। लोकबंधु में भी बढ़े मरीज
राजनारायण लोकबंधु संयुक्त अस्पताल की OPD और इमरजेंसी में भी ठंड के लक्षण के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। अस्पताल के निदेशक डॉक्टर सुरेश कौशल कहते हैं कि ठंड के समय कुछ समस्याएं बेहद कॉमन हैं। इनमें हाई बीपी, शुगर, जोड़ों में दर्द शामिल है। यदि कोई मरीज इसकी गंभीर लक्षण के साथ आते हैं तो उनका अस्पताल में इलाज भी किया जाता है। OPD के फिजिशियन क्लिनिक में भी ऐसे मरीजों की तादाद बढ़ी है। इसके अलावा इमरजेंसी में भी कुछ मरीज ऐसे ही लक्षण के सामने आते हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि दवाओं से इन्हें आराम भी मिल जाता है। अब जानें ठंड में क्यों बढ़ता ब्लड प्रेशर?
लखनऊ के सिविल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अध्यक्ष डॉ. राजेश श्रीवास्तव कहते हैं कि ठंड के दौरान शरीर के तापमान को मेंटेन करने के लिए पेरीफेरल वेसल सिकुड़ जाती है। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। ब्लड कोगुलेशन की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में हाई बीपी का होना बेहद खतरनाक हो सकता है। एक्सपर्ट से लें जरूरी सलाह
सबसे अहम बात यह है कि जिन्हें पहले से कोई गंभीर समस्या है, उनमें बीपी का बढ़ जाना और भी खतरनाक है। इसको लेकर लापरवाही बरतना ठीक नहीं है। यदि आप पहले से इसके लिए कोई मेडिसीन ले रहे हैं, तो ठंड के दौरान एक बार एक्सपर्ट डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। दवाओं का नियमित सेवन करना चाहिए। हाई बीपी से ब्रेन हैमरेज का खतरा
लखनऊ के मेदांता अस्पताल के चिकित्सक डॉ. शोभित शाक्य कहते हैं कि हाई बीपी को लेकर लापरवाही बरतना ठीक नहीं है। ठंड के दौरान ऐसी कई समस्याएं आती है। हल्की सी भी लापरवाही भारी पड़ सकती है। कुछ ऐसे मामले हाल के दिनों में सामने आए हैं जिन्हें हाई बीपी के कारण अचानक से ब्रेन हेमरेज हो गया। इसलिए अलर्ट रहना होगा। ………………………………. यह भी पढे़ें ठंड में हांफ रहे फेफड़े, अस्थमा कर रहा अटैक:OPD और इमरजेंसी में बढ़े मरीज; एक्सपर्ट बोले- दवा का नियमित सेवन जरूरी ठंड में सांस के रोगियों की समस्याओं में इजाफा हुआ है। बड़ी संख्या में सांस फूलने की समस्या के मरीज जिला अस्पताल से लेकर चिकित्सा संस्थानों में पहुंच रहे हैं। इनमें उन मरीजों की भी तादाद है, जिनमें ऐसे लक्षण पहली बार आ रहे हैं। इसके अलावा कई ऐसे मरीज भी हैं, जो पहले से इन परेशानियों को झेल रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर…


