घर की माली हालत खराब थी। कभी पढ़ाई नहीं कर पाए। दूसराें के खेत की रखवाली, पानी देना खेत काे संभालना अब जमीन सिकमी लेकर किसानी कर खेतीहर मजदूर ने अपनी तीन बेटियाें काे देशसेवा के लिए तैयार किया। दाे बेटियां मप्र पुलिस और एक बेटी बीएसएफ में हैं। यह कहानी है नर्मदापुरम से 17 किमी दूर ग्राम बैराखेड़ी निवासी दिनेश सिंह राजपूत की है। दिनेश बताते हैं कि वे पढ़ाई ताे नहीं कर पाए, लेकिन अपने बच्चाें काे पढ़ाने के लिए मेहनत करने में काेई कसर नहीं छाेड़ी। चार बेटियाें में से तीन कांस्टेबल बनीं किसान दिनेश राजपूत के परिवार में उनकी पत्नी उषा, बड़ी बेटी पूजा राजपूत 12वीं तक पढ़ी। पूनम दाे वर्ष पूर्व मप्र पुलिस में हेड कांस्टेबल बनीं। बेटा साैरभ 12वीं में है। साेनम दाे वर्ष पूर्व मप्र पुलिस में हेड काॅन्स्टेबल नियुक्त हुई हैं। वैष्णवी राजपूत बीए का बीएसएफ में कांस्टेबल पद पर हाल ही में चयनित हुई हैं। बेटियाें काे पढ़ाया ताे बदले पूरे परिवार के हालात… मां उषा राजपूत ने बताया कि लाेग अपनी बेटियाें काे पढ़ाने से बचते हैं राेकते हैं। हमने बेटियाें काे पढ़ाया आज वे बेहतर मुकाम पर हैं। पहले हमारी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। बड़ी बेटी का विवाह सम्मेलन से किया। अब पीएम अवास भी बन गया है। दूसरी बेटी की शादी भी कर दी। पत्नी उषा ने भी सिलाई कर चलाया घर दिनेश सिंह राजपूत की 4 बेटियां हैं। पत्नी उषा राजपूत ने ताे समय पर सभी की शादी करने की बात कही लेकिन उन्हाेंने पढ़ाई करने के लिए आगे बढ़ाया। इतना हीं नहीं दिनेश सिंह राजपूत की पत्नी उषा राजपूत भी सिर्फ चाैथी तक पढ़ी हैं। वे घर में कपड़े सिलाई कर हाथ बटाती थीं। दाेनाें ने मिलकर बच्चाें काे काबिल बनाने के लिए दिन रात मेहनत की।


