बेटियों को पता नहीं माता-पिता-भाई दुनिया में नहीं रहे:बिलखते हुए दादा बोले- काफी मन्नतों से पैदा हुआ था पोता, सब खत्म हो गया

जयपुर में रिंग रोड पर हुए भयानक हादसे में दो परिवार के 7 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। जयपुर में वाटिका के रहने वाले रामराज, उनकी पत्नी और 14 महीने के बच्चे की मौत हो गई। दूसरी तरफ रामराज के ससुराल (फुलियाकलां, भीलवाड़ा) के चार लोग खत्म हो गए। रामराज के 4 बेटी हैं। काफी मन्नतों के बाद घर में बेटा पैदा हुआ था। अब चार बेटियों के सिर से माता-पिता का साया उठ गया है। बेटियों को पता नहीं है कि माता-पिता-भाई दुनिया में नहीं रहे। हादसे के बाद भास्कर टीम उस अस्पताल में पहुंची, जहां सभी के शव लाए गए थे। रामराज के पिता और पीड़ित परिवार के रिश्तेदारों से बातचीत कर उनका दर्द जाना। फूट-फूटकर रो रहे रामराज के पिता बोले- काफी मन्नतों से पोता पैदा हुआ था। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पहले पढ़िए क्या है घटनाक्रम?
हरिद्वार से आ रही टोयोटा इटिओस कार जयपुर के शिवदासपुरा इलाके में रिंग रोड से अंडरपास में भरे पानी में गिर गई। हादसे में वाटिका के रहने वाले रामराज वैष्णव (38), उनकी पत्नी मधु (36) और 14 महीने के बेटे रुद्र उर्फ वीरू की मौत हो गई। वहीं, रामराज के चाचा ससुर अशोक वैष्णव उर्फ कालूराम (47), उनकी पत्नी सीमा देवी (45), बेटे रोहित (23) और पोते गजराज (3) की भी जान चली गई। हादसा शनिवार देर रात हुआ, जिसकी जानकारी रविवार दोपहर 12:30 बजे लगी। जयपुर में रहने वाला परिवार… भीलवाड़ा के फुलियाकलां निवासी परिवार… दादा ससुर के अस्थि विसर्जन के लिए गए थे
महात्मा गांधी अस्पताल में पहुंचे एक रिश्तेदार सीताराम ने बताया कि वाटिका निवासी रामराज वैष्णव के दादा ससुर गोपाल दास की गुरुवार को मौत हो गई थी। शुक्रवार को ये लोग उनका अस्थि विसर्जन करने के लिए निकले थे। पूरी विधि से अस्थि विसर्जन करने के बाद शनिवार को सभी लोग भीलवाड़ा के फुलियाकलां गांव लौट रहे थे। इसी दौरान रिंग रोड पर प्रहलादपुरा रीको के नजदीक कार बेकाबू होकर डिवाइडर से टकरा गई। इसके बाद रिंग रोड से 16 फीट नीचे अंडरपास में भरे पानी में गिर गई। रामराज खुद की टोयोटा इटिओस टैक्सी कार चलाता था। चाचा ससुर और साले ने साथ हरिद्वार चलने को कहा ताकि यात्रा आसान हो जाएगी और रामराज गाड़ी भी चला लेगा। ड्राइवर पेशा होने के चलते रामराज लंबी दूरी तक आता-जाता भी रहता था। रविवार दोपहर तक तो घर में लोग उनके लौटने का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान दोपहर करीब 12:30 बजे शिवदासपुरा थाने से फोन आया और जयपुर के महात्मा गांधी अस्पताल आने को कहा। काफी मन्नतों के बाद पैदा हुआ था बेटा
रामराज वैष्णव के घर में 14 महीने पहले ही बेटे ने जन्म लिया था। रामराज के 5 लड़कियां थीं, उनमें से एक की मौत हो गई थी। काफी मन्नतों के बाद घर में बेटा रुद्र उर्फ वीरू (14 माह) हुआ था। रामराज और उसकी पत्नी ने कई मंदिरों में मन्नतें मांगी थीं। महीनों तक व्रत भी किए थे। अस्पताल में हमारी मुलाकात रामराज के बुजुर्ग पिता पीरूमल से हुई। घटना के बाद उनके आंसू रुकने के नाम नहीं ले रहे थे। उन्होंने रोते हुए बताया कि घर में बहनों, मां-बाप और सभी का प्यारा था वीरू। दिन भर घर में उसके खेलने से चहलकदमी रहती थी। अब सब सूना हो गया। इस हादसे में सब कुछ खत्म हो गया। पीरूमल ने बताया कि 12 सितंबर को ही मैं भीलवाड़ा से घर आया था। उस दिन के बाद बेटे से बात नहीं हुई। मेरे सामने ही बेटा सभी के साथ रवाना हुआ था। रविवार को उनको लौटना था। लेकिन उनकी मौत की खबर मिली है। चार बेटियों के सिर से उठा मां-बाप का साया
पीरूमल ने बताया कि रामराज के चार बेटियां हैं। सबसे बड़ी बेटी करीब 16 साल की है। वहीं छोटी बेटी आठ साल की है। एक बेटी की चार साल पहले पैदा होते ही मौत हो गई थी। अब हादसे के बाद चारों बच्चियों के सिर से पिता और मां का साया उठ गया। हादसे ने उनके लाडले भाई को छीन लिया। बच्चियों को तो यह तक नहीं पता कि उनके माता-पिता और प्यारा भाई अब दुनिया में नहीं रहे। बच्चियां नाना के घर ही हैं। मां मधु ने जाते हुए बड़ी बेटी से कहा था- सभी बहनों का ध्यान रखना, हम एक-दो दिन में लौट आएंगे। दादा-दादी, बेटे और पोते की मौत
हादसे का शिकार हुए कालूराम फुलियाकलां (भीलवाड़ा) के रहने वाले थे। उनके पिता का देहांत हुआ था। उनकी अस्थि विसर्जन कर लौटते समय कालूराम, उनकी पत्नी सीमा, बेटे रोहित और पोते गजराज की मौत हो गई। रिश्तेदार सीताराम ने बताया कि रोहित, कालूराम का बड़ा बेटा था। रोहित के एक बेटा था। दोनों बाप-बेटे की मौत हो गई। उसकी पत्नी को भी अभी ये नहीं बताया कि एक्सीडेंट में रोहित की मौत हो गई, उसे सिर्फ ये बताया कि एक्सीडेंट की सूचना है। आखिरी फोन : रात साढ़े आठ बजे बात हुई
अस्पताल में मौजूद बाबूराम ने बताया कि उनकी रामराज से शनिवार शाम को आखिरी बार बात हुई थी। दिन में फोन लगाया था, लेकिन तब बात नहीं हो पाई थी, इसलिए शनिवार रात को करीब 8.30 बजे कॉल किया था। उस समय वह गाड़ी चला रहा था। उसने बताया था कि हम जयपुर की तरफ आ रहे हैं, रास्ते में हैं। कुछ देर में जयपुर पहुंचेंगे। बस इतनी बात होने के बाद फोन कट गया था। इसके बाद हादसा कब हुआ? इसकी कोई जानकारी नहीं है। रामराज भीलवाड़ा ही जाता, लेकिन उससे पहले कुछ देर घर रुककर जाने वाला था। हादसा कैसे हुआ कुछ समझ नहीं आ रहा?
रामराज के घरवालों का कहना है कि हादसा कैसे हुआ, ये अभी पता नहीं लगा है। नाले में कार उल्टी पड़ी हुई थी। हो सकता है किसी दूसरी गाड़ी ने उनकी कार को टक्कर मारी हो या झपकी आने से ये हादसा हुआ हो। हालांकि घरवालों का ये भी कहना है रामराज गाड़ी कभी 60 की स्पीड से ऊपर नहीं लेता था। उसे लंबे रूट पर गाड़ी चलाने का लंबा अनुभव था। डिवाइडर के बीच खाली जगह से गिरी कार
SHO सुरेंद्र सैनी ने बताया- रिंग रोड पर डिवाइडर के बीच करीब 20 फीट खाली जगह है। इसके बीच में से कार नीचे पानी में गिरी थी। प्रथम दृष्टया जांच में आया है कि हादसे के समय कार स्पीड में थी। झपकी आने से डिवाइडर के बीच में बने पासिंग से टकराकर कार नीचे अंडरपास में गिर गई। बिना आराम किए ड्राइवर 38 घंटे से चला रहे थे कार
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ड्राइवर रामराज बिना आराम किए लगातार 38 घंटे से गाड़ी चला रहे थे। भीलवाड़ा से हरिद्वार, फिर वापस घटनास्थल तक करीब 1250 किमी कार चला चुके थे। कार रविवार अलसुबह 5:04 बजे रिंग रोड के हिंगोनिया टोल से निकली थी। वहां से 10 मिनट में ही 18 किमी दूर प्रहलादपुरा स्थित घटनास्थल तक पहुंची थी। शनिवार शाम करीब चार बजे हरिद्वार से रवाना हुए थे। रात साढ़े नौ बजे मेरठ से गुजरे थे। अब अकेली रह गईं चार बहनें
वाटिका-सांगानेर निवासी रामराज और मधु के साथ उनके बेटे रुद्र की भी हादसे में मौत हो र्ग। अब उनकी चार बेटियां इस दुनिया में अकेली रह गईं। रुद्र चारों बहनों में सबसे छोटा था। अशोक उर्फ कालूराम (मृतक) धानेश्वर तीर्थ स्थल स्थित रावणा राजपूत समाज के मंदिर में पुजारी थे। उनका बेटा रोहित फूलियाकला में ही किराने की दुकान चलाता है। परिवार वालों ने सोचा- पुष्कर की पहाड़ियों में नेटवर्क नहीं मिल रहा है
परिवार वालों का कहना है कि रात 11 बजे रामराज ने फोन कर कहा था कि दिल्ली हैं। सुबह 11 बजे तक भीलवाड़ा पहुंच जाएंगे। सुबह परिवार वालों ने फोन मिलाया तो बंद आया। अनहोनी से बेखबर परिवार वालों ने सोचा कि सभी पुष्कर चले गए और पहाड़ियों में नेटवर्क नहीं मिल रहा होगा। यह खबर भी पढ़ेंः जयपुर में रिंग रोड से गिरी कार, 7 की मौत:अस्थि विसर्जन कर हरिद्वार से लौट रहे थे, 16 फीट नीचे पानी में गिरी गाड़ी

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