भास्कर न्यूज | बेमेतरा जिला न्यायालय में लगी नेशनल लोक अदालत ने सिर्फ कानूनी प्रकरणों का समाधान ही नहीं किया, बल्कि बिखरे परिवारों को जोड़कर रिश्तों में नई रोशनी भी जगाई। परिवार न्यायालय में कुल 28 प्रकरणों का निपटारा हुआ, जिनमें 8 दंपत्तियों को पुनः साथ भेजा गया। 63 वर्षीय एक विधवा मां ने अपने ही पुत्रों के खिलाफ परवरिश का मामला दायर किया था। मां की पीड़ा सुनकर न्यायालय ने पुत्रों को समझाइश दी। न्यायाधीश की प्रेरणा और भावनात्मक संवाद के बाद पुत्रों ने मां से माफी मांगी और जीवनभर देखभाल करने का वचन दिया। मां के आंसू झलक पड़े और उनके चेहरे पर वर्षों बाद संतोष की मुस्कान दिखाई दी। इसके अलावा एक दंपती जो 9 से आपसी मतभेदों में उलझे थे। बच्चों और परिवार की खातिर पुराने गिले-शिकवे भुलाकर फिर से एक हो गए। विशेष रूप से एक दंपती जो पिछले 20 वर्षों से अलग रह रहा था, न्यायाधीश नीलिमा सिंह बघेल की काउंसिलिंग और समझाइश से पुनः साथ आने के लिए राजी हो गया। यह दृश्य वहां मौजूद सभी के लिए बेहद भावुक कर देने वाला था। लोक अदालत के अंत में, जब दंपतियों को पुनः साथ विदा किया गया। तब उन्हें नारियल, तुलसी का पौधा और सप्तपदी के सात वचन भेंट किए गए। यह प्रतीकात्मक उपहार है। कवर्धा|मिनीमाता सम्मान के लिए आवेदन 26 सितंबर तक जिला कार्यालय महिला बाल विकास विभाग में जमा कर सकते हैं। दो लाख रुपए दिया जाता है। नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बेमेतरा बृजेन्द्र कुमार शास्त्री ने किया। उन्होंने न्यायाधीश, अधिवक्ताओं और कर्मचारियों को अधिक से अधिक प्रकरणों का निराकरण करने प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि लोक अदालत लंबे समय से चले आ रहे विवादों को सौहार्दपूर्ण ढंग से समाप्त करने का उत्कृष्ट माध्यम है और इसमें सभी का सक्रिय योगदान आवश्यक है। न्यायालय परिसर में विधिक सहायता डेस्क, स्वास्थ्य डेस्क, स्वचलित चिकित्सकीय वेन, बैंक, विद्युत विभाग और फाइनेंस कंपनियों के डेस्क लगाए गए।


