ग्वालियर थाना क्षेत्र के गौसपुरा नंबर 1 में एक युवक ने अपनी मां सहित जहर खाकर खुदकुशी कर ली। पोस्टमार्टम के दौरान मृतक मनीष राजपूत की जेब से डॉक्टरों को सुसाइड नोट मिला है। जिसमें दोनों के स्वेच्छा से जहर खाने की बात लिखी थी। नोट में खुदकुशी के लिए किसी को भी दोषी भी नहीं ठहराया गया है। मृतक के भाई ने बताया कि मृतक मनीष कंप्यूटर साइंस से बीई था और उसकी नौकरी नहीं लग रही थी, जिससे वह डिप्रेशन में रहता था। भाई अनिल ने गम में मां की अटैक से मौत होने की सूचना पुलिस को दी थी। बाद में पोस्टमार्टम के दौरान मृतक मनीष राजपूत के पास सुसाइड नोट में हम दोनों के स्वेच्छा से जहर खाने की बात से मां राधा(65) की मौत भी जहर से होने का खुलासा हुआ। इसके बाद मां के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
जला दी थीं डिग्रियां, तोड़ दिया था लेपटॉप
मृतक मनीष के पिता राजकुमार राजपूत (71) ने बताया कि उनके छोटे बेटे मनीष(33) ने बानमोर स्थित श्रीराम कॉलेज से इंजीनियरिंग (बीई कंप्यूटर साइंस) किया था। मगर करीब 6 साल से उसे कोई नौकरी ही नहीं मिल रही थी, वह नौकरी के लिए तैयारी भी कर रहा था। ऐसे में वह डिप्रेशन में आकर 2 बार घर से भी भाग चुका था, मगर फिर वापस लौट आया। वहीं उसने एक बार गुस्से में आकर अपनी सभी डिग्रियां व अन्य डॉक्यूमेंट जला दिए थे। बाद में उन्हें डुप्लीकेट निकालना पड़ा। बुजुर्ग का कहना है कि उनकी पत्नी व बेटे ने क्यों खुदकुशी कर ली, पता नहीं है। मां-बेटे की साथ उठी अर्थी, हर कोई रोया मां राधा और बेटा मनीष के सुसाइड करने के बाद घर के आंगन में सजाई गई दोनों की अर्थी। जिसने देखा वही रोया। चाय का ठेला लगाते हैं पिता, बेटे को आती थी शर्म
गमगीन परिवार के साथ बैठे पप्पू गुर्जर ने बताया कि राजकुमार राजपूत जेसी मिल में नौकरी करते थे। मिल के बंद हो जाने के बाद उन्होंने चाय का ठेला लगाना शुरू कर दिया। उसी से अपने 2 लड़के और 2 लड़कियों को पढ़ाया। 3 बच्चों की शादी हो चुकी है, ऐसे में वे अलग रहते थे। छोटा बेटा मनीष इस बात को लेकर अवसाद में रहता था कि वह बहुत पढ़ा-लिखा है, मगर नौकरी नहीं है। कोई छोटा-मोटा काम वह करना नहीं चाहता था। उसके पिता सिविल अस्पताल के सामने चाय का ठेला लगाते थे, मनीष इस बात को लेकर भी शर्मिंदगी महसूस करता था। घर से 2 बार भागा, बोलता था ‘मैं ठेला नहीं लगा सकता’
पड़ोसियों ने बताया कि युवक नौकरी की टेंशन में दो बार घर से भाग चुका था। एक बार वह दो माह में लौटा, दूसरी बार 3 दिन में आ गया। वह बार-बार कहता था कि वह ठेला नहीं लगा सकता। पड़ोसियों से नहीं होती थी बातचीत, दुखी रहता था
पड़ोसियों ने बताया कि मनीष बहुत अधिक तनाव में रहता था। मोहल्ले में अपनी उम्र के युवकों से वह बातचीत नहीं करता था। इसका कारण अन्य युवकों की नौकरी के साथ शादी होना थी। पिता बोले- बेटे ने कहा था मैंने जहर खा लिया, मैंने मजाक समझ लिया मनीष के पिता राजकुमार शनिवार की रात लगभग 10.30 बजे अपना चाय का ठेला बंद कर घर पहुंचे। उसने मनीष से कहा खाना ले आओ, इस पर मनीष ने कहा आज खाना नहीं बना। मैंने जहर खा लिया। मनीष कई बार गुस्से में ऐसी बातें करता था, इसलिए पिता ने बेटे की बात को गंभीरता से नहीं लिया और थके होने के बाद भी खुद खाने के लिए चावल बनाए। वह जब चावल खा रहे थे तभी बेटा मनीष उन्हें उल्टी करता दिखा। इस पर उन्हें उसकी बोली बात सही लगी और उन्होंने बेटे अनिल को फोन किया। जब बेटे का फोन नहीं उठा तब पिता ने बहू को फोन किया और अनिल को जल्द घर पहुंचाने को कहा। इसके बाद पिता ने फिर बहू को फोन किया और बताया कि मनीष के जहर खा लयिा है। इस पर बहू ने पति को फोन कर पति को बताया। अनिल पड़ोसी के घर से पहुंचा और भाई को अस्पताल ले गया
अनिल घर पहुंचा तब ताला लगा था। पिता से चाबी देने को कहा तो पिता ने कहा कि चाबी मनीष ने फैंक दी है, तुम गेट तोड़ दो। गेट नहीं टूटा तो अनिल पड़ोसी के घर से अपने घर पर पहुंचा और हथौड़े से ताला तोड़ कर भाई मनीष को सामने स्थित सिविल अस्पताल ले गए और वहां से हजार बिस्तर वाले अस्पताल ले गए। अस्पताल में मनीष का इलाज शुरू कर दिया गया था तभी पिता राजकुमार अपनी पत्नी राधा को अस्पताल लेकर पहुंचे। राधा को डॉक्टरों ने तत्काल मृत घोषित कर दिया और बेटे की तड़के तीन बजे के बाद मौत हो गई। सुसाइड नोट जस का तस हम मां-बेटे अपनी मर्जी से आत्महत्या कर रहे हैं। इसमें किसी की कोई गलती नहीं हैं। हमारे मरने के बाद पुलिस किसी को परेशान न करे। मरने के बाद हमारी आखिरी इच्छाएं हैं। हो सके तो इन्हें पूरा कर देना।
(1) लोहे की गोदरेज में कुछ मम्मी के पैसे रखे हैं, उन्हें बराबर-2 चुन्नू, रौनक और माधू को दे देना।
(2) मरने के बाद भैया-भाभी (अनिल राजपूत और पूनम राजपूत) हमारी लाश को हाथ न लगाएं। पैसे चुन्नू, रौनक, माधू में बांट देना
मां-बेटे की खुदकुशी के मामले में सुसाइड नोट में मृतक का भैया-भाभी के प्रति आक्रोष दिखा है। नोट में दो अंतिम इच्छाएं लिखी है यह भी लिखा है कि हो सके तो पूरी कर देना। अंतिम इच्छा यह है कि भैया-भाभी(अनिल राजपूत व पूनम राजपूत) हमारी लाश को हाथ न लगाएं। सुसाइड नोट पोस्टमार्टम करने वाले डॉ.अजीत राजपूत को शर्ट की जेब में मिला। बाद में डॉक्टर ने नोट पुलिस को सौंप दिया।


