राज्य के नगर निकायों में सफाई कर्मचारियों की भर्ती होगी या संविदा पर कर्मचारी रखे जाएंगे, इस पर राज्य सरकार के स्तर पर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है। फिलहाल असमंजस बना हुआ है। इससे बेरोजगार खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। इससे पहले सफाई कर्मचारियों की भर्ती तीन बार टल चुकी है। बेरोजगारों को रोजगार देने के लिए कांग्रेस सरकार में निकली सफाई कर्मचारी भर्ती के ग्रहण लगने की वजह से बीजेपी सरकार में भी नहीं हो पा रही है। बार-बार नियमों में खामियों और सफाई कर्मचारी यूनियन के विरोध के बाद डीएलबी ने तीसरी बार 4 दिसंबर को भर्ती स्थगित की गई थी। राज्य सरकार की भर्ती की स्पष्ट नीति नहीं होने की वजह से नियमों में बार-बार संशोधन करने के बाद आखिर में डीएलबी को भर्ती स्थगित करनी पड़ी। बता दें कि कांग्रेस सरकार की निकली भर्ती को भाजपा सरकार ने निरस्त कर दी थी। इसके बाद नए नियम बनाए। 27 नवंबर से भर्ती के लिए फिर से आवेदन शुरू हुए, लेकिन भर्ती में नगर निगम, नगर निकाय और नगर पालिका की ओर से जारी अनुभव प्रमाण पत्र लेने का विरोध शुरू हो गया। डीएलबी ने स्थगित कर दी थी भर्ती; सरकार ने प्रदेश में 23820 पदों पर सफाई कर्मचारियों की सीधी भर्ती की सूचना प्रकाशित की थी। इसमें से 4077 पदों पर हेरिटेज और ग्रेटर निगम में भर्ती होनी थी, लेकिन डीएलबी ने एक आदेश जारी कर जयपुर के दोनों निगमों में भर्ती स्थगित कर दी थी। भर्ती स्थगित करने से पहले सफाई यूनियन के साथ डीएलबी की हुई समझौता वार्ता में जयपुर में संविदा पर कर्मचारी लगाने पर सहमति बनी थी। इसका पूरे प्रदेश में विरोध होने लगा कि जब जयपुर में संविदा पर कर्मचारी लगाएंगे तो अन्य जगह भर्ती क्यों? तीसरी बार भर्ती स्थगित होने के बाद अब राज्य सरकार के स्तर पर अभी तक यह निर्णय नहीं हुआ है कि दोनों निगमों में संविदा पर कर्मचारी रखे जाएंगे या फिर से भर्ती के लिए आवेदन मांगे जाएंगे। सफाई कर्मचारियों को लेकर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है। राज्य सरकार के स्तर पर भर्ती करने अथवा संविदा पर कर्मचारी रखने पर मंथन चल रहा है। कुमार पाल गौत्तम, निदेशक एवं विशिष्ट शासन सचिव, स्वायत्त शासन विभाग


