बेसहारा घायल को देखकर जागी सेवा की अलख, 1997 में 30 हजार रुपए जुटाकर भाई मनजीत ने शुरू की फ्री इलाज सेवा

गुरमीत लूथरा 1996 में हुई एक घटना ने भाई मनजीत सिंह पर ऐसा असर डाला कि मन में निष्काम सेवा करने की अलख जगा दी। 1996 में मनजीत सिंह पैदल ही ईस्ट मोहन नगर बाजार से गुजर रहे थे कि उन्होंने एक बेसहारा घायल को दर्द से तड़पते देखा। भाई मनजीत सिंह घायल को इलाज के लिए रिक्शे पर बिठाकर पिंगलवाड़ा पहुंचाया। भाई मनजीत सिंह ने उन पलों को याद करते हुए बताया कि अफसोसजनक है कि पिंगलवाड़ा में इलाज होने के बावजूद घायल बच न सका, इसके बाद उन्होंने ऐसे बेसहारा मरीजों के लिए कुछ करने की ठानी। 1997 में भाई मनजीत सिंह टीबी अस्पताल तो गए अपने इलाज के लिए मगर 5 ऐसे मरीजों को 2500 रुपए दिए जिनके पास दवा खरीदने तक के लिए पैसे नहीं थे।
इस घटना के बाद उन्होंने दानी सज्जनों के साथ मिलकर डिस्पेंसरी अथवा क्लीनिक खोलने का फैसला कर लिया। 1997 के दौर में दानियों से 30 हजार रुपए इकट्ठे कर ईस्ट मोहन नगर क्षेत्र में ही एक क्लीनिक से शुरुआत की। अब वह भाई घनैया जी मिशन सोसायटी के बैनर तले सालाना 1.70 करोड़ खर्च कर शहर में 2 अस्पताल एवं 4 डिस्पेंसरी चला रहे हैं जहां 20 से अधिक डाक्टर और स्टाफ काम कर रहे हैं। 500 से ज्यादा दानियों के दान से मात्र 20 रुपए की पर्ची पर उक्त अस्पतालों व डिस्पेंसरी में 3 दिन की दवाई भी मरीजों को फ्री दी जाती है। रोजाना 600 से मरीज उक्त अस्पतालों, डिस्पेंसरियों व भाई घनैया जी मोबाइल वैन के माध्यम से फ्री ओपीडी के माध्यम से इलाज करवा रहे हैं। मोबाइल वैन हफ्ते में 6 दिन अलग-अलग जगहों पर जाकर मरीजों का मुफ्त इलाज करते हैं। इसके अलावा सोसायटी के पास एक शव वाहन भी है जिसमें शवों को श्मशानघाट ले जाकर अंतिम संस्कार किया जाता है। जो परिवार इसका खर्च देने में असमर्थ होता है उनसे कोई पैसा नहीं लिया जाता है। बीते 9 मई को भी एसजीपीसी अधिकारी अजायब सिंह अभियासी ने सोसायटी के चेयरमैन भाई मनजीत सिंह को एक लाख रुपए का चैक प्रदान किया। उनके साथ पूर्व डिप्टी मेयर व पार्षद अवतार सिंह ट्रका वाले, टेस्ट अप आइसक्रीम के मालिक जगमोहन सिंह दुआ भी थे। भाई मनजीत सिंह ने बताया कि सारा खर्च दानियों के दान से चलता है। एसजीपीसी हर साल मई में एक लाख रुपए दान के रूप में सोसायटी को प्रदान करती है। इसके अलावा किसी भी संस्था या सरकार से कोई अनुदान नहीं मिलता है। शेष दानी सज्जनों व सोसायटी के सदस्यों द्वारा डाले गए योगदान से ही मरीजों का चेकअप और इलाज किया जाता है। उनका कहना है कि जरूरतमंदों की मदद करके सुकून मिलता है।

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